
History of pizza: पार्टी हो या कुछ टेस्टी खाने का मन हो, अक्सर लोग पिज्जा खाना पसंद करते हैं. अब ऐसे में दुनिया के किसी भी कोने में लग्जरी और पार्टी की पहली पसंद पिज्जा ही होता है. वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक, भारत में प्रति व्यक्ति सालाना पिज्जा खपत 1.3 किलोग्राम है. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि दुनिया के साथ-साथ भारत में भी पिज्जा कितना पसंद किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं पिज्जा का जन्म पेट भरने की मजबूरी और देर तक पेट भरा रखने के लिए हुआ था. आज यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का ग्लोबल बिजनेस बन चुका है. तो आइए आज पिज्जा का इतिहास जान लीजिए.
इटली के नेपल्स शहर में रहने वाले गरीब मजदूरों के पास भरपेट खाना खरीदने के पैसे नहीं थे. ऐसे में सड़कों पर बिकने वाली एक सस्ती चपटी रोटी उनका सहारा बनी थी जिससे वो पेट भरते थे. उसे ही आज हम पिज्जा के नाम से जानते हैं.
हिस्ट्री टुडे की के मुताबिक, 1790 के दशक में जब नेपल्स में इंडस्ट्रीज तेजी से बढ़ रही थीं, तब वहां के दिहाड़ी मजदूरों को एक ऐसे भोजन की जरूरत थी जो सस्ता हो और जिसे काम के बीच चलते-फिरते खाया जा सके. ऐसे में 1760 से 1830 के बीच उस समय फ्लैटब्रेड (चपटी रोटी) पर लहसुन, नमक और चर्बी डालकर बेचे जाते थे जिसे मजदूर खा लेते थे और उनका पेट देर तक भरा रहता था. उस पर कभी-कभी इसमें टमाटर या छोटी मछलियां भी डाल दी जाती थीं जो मजदूर काफी चाव से खाते थे.

हिस्ट्री हिट की अनुसार, पिज्जा के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव साल 1889 में आया. दरअसल, राजा अम्बर्टो 1 और रानी मार्गरिटा (Margherita of Savoy) नेपल्स की यात्रा कर रही थीं. उस समय वह फ्रांसीसी खाना खा खाकर ऊब चुकी थीं और ऐसे में वे कुछ लोकल डिश खाना चाहती थीं. ऐसे में उनके लिए फेमस पिज्जा मेकर राफेल एस्पोसिटो को बुलाया गया और उन्होंने रानी के लिए 3 तरह के पिज्जा बनाए, जिनमें से एक रानी को बेहद पसंद आया.

रानी को जो पिज्जा सबसे ज्यादा पसंद आया, उसमें इटली के झंडे के 2 रंगों को दिखाया गया था. इसमें लाल रंग के लिए टमाटर, सफेद के लिए मोजेरेला चीज और हरे रंग के लिए बेसिल (तुलसी) के पत्तों का इस्तेमाल किया गया था. रानी के सम्मान में इस पिज्जा का नाम 'पिज्जा मार्गरीटा' रखा गया. आज भी नेपल्स में एक प्लेट लगी है जो इस घटना के बारे में बताती है.

नेपल्स से निकलकर पिज्जा दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका पहुंचा और वहां से पूरी दुनिया में लोकप्रिय गया. जो खाना कभी गरीबी की निशानी था, उसे आज दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है. आज के समय में कई ब्रांड्स पिज्जा की अलग-अलग क्वालिटी बेचते हैं और साथ ही लोग इसे अपनी पंसद के मुताबिक, कस्टमाइज भी करा सकते हैं.