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चुपचाप गम सहना हो सकता है खतरनाक

‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो.’ स्वर्गीय जगजीत सिंह की ये गजल अगर आप पर भी लागू होती है तो संभल जाएं. क्योंकि बुरे वक्त में मुस्कुराना, किसी से बात नहीं करना, चुपचाप गम को सहना और आंसुओं के घूंट पीना सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. एक नई रिसर्च में ये बात सामने आयी है.

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‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो.’ स्वर्गीय जगजीत सिंह की ये गजल अगर आप पर भी लागू होती है तो संभल जाएं. क्योंकि बुरे वक्त में मुस्कुराना, किसी से बात नहीं करना, चुपचाप गम को सहना और आंसुओं के घूंट पीना सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. एक नई रिसर्च में ये बात सामने आई है.

ऐसा देखा गया है कि जब लोग बुरे दौर में होते हैं या उनका मूड ठीक नहीं होता तो वे जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हैं. लेकिन ये मुस्कुराहट उन्हें दु:ख, गम या बुरे मूड से निकालने की जगह उल्टा नुकसान ही पहुंचाती है. असल में जब व्यक्ति खराब मूड में मुस्कुराता है तो दिमाग उस मुस्कुराहट को भी खुशी की जगह गम के साथ जोड़ देता है. इसके बाद अगली बार जब भी वो मुस्कुराता है तो दिमाग को वही बुरा दौर फिर से याद आने लगता है.

स्टडी में सामने आया है कि जब लोग बनावटी हंसी से अपने को खुश दिखाने की कोशिश करते हैं तो ये हंसी उनके मूड को ठीक नहीं करती, लेकिन वे दु:ख को छिपाने के लिए मुस्कुराहट को नकाब की तरह इस्तेमाल करते हैं. हांगकांग विश्वविद्यालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के एसोसिएट प्रोफेसर अनिर्बान मुखोपाध्याय का कहना है कि लोगों को दांत दिखाने से पहले इंतजार करना चाहिए कि उनका मूड ठीक हो जाए. गम में मुस्कुराना घातक हो सकता है.

मुखोपाध्याय ने आगे कहा कि असल में मुस्कुराहट भी खुशी को बढ़ाने में सहायक नहीं होती है.

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