scorecardresearch
 

कश्मीर की आलीशान दावतों में शुमार वाज़वान, जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत

Kashmiri Wazwan: कश्मीरी शादियों की दावत में खिलाए जाने वाले खानों को वाज़वान कहा जाता है. वाज़वान दरअसल कोई डिश नहीं बल्कि एक पलेटर है, जिसमें कम से कम सात तरह की डिश और अधिकतम 36 तरह की डिश को शामिल किया जाता है. इस दावत के लिए खाना तैयार करने का, परोसने का और खाने का अलग अंदाज है. आइए जानते हैं क्यों इतना खास है कश्मीर का वाज़वान.

Advertisement
X
Kashmiri Wazwan
Kashmiri Wazwan

भारत में खान-पान को खास तवज्जो दी गई है. चाहे वो लखनऊ का मुगलई जायका हो या कश्मीर का वाज़वान. हिंदुस्तान के सिर का ताज कश्मीर अपनी खूबसूरती के लिए पूरे जहान में मशहूर है. यहां जो भी आता है उसकी जुबान पर दो चीजें हमेशा के लिए रह जाती हैं, एक यहां की वादियां और दूसरा यहां का खान-पान.

खानपान के मामले में कश्मीर ने अपनी एक अलग दुनिया बना रखी है. भारत में कश्मीर उन राज्यों में से एक है जहां अगर खानपान की बात की जाए तो 1 या 2 डिश की नहीं बल्कि पूरी दावत की बात होती है. दावत में भी सिर्फ खाने का नहीं बल्कि इसे परोसने और बनाने का भी बेहद अलग अंदाज हैं. कश्मीर के खानपान की बात की जाए तो इसमें सबसे पहला नाम वाज़वान का आता है.

पहले जानते हैं वाज़वान है क्या?

अगर आप हिंदुस्तान की अलग-अलग आलीशान दावतों का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो कश्मीर में हो रही शादियों की दावत में जरूर शामिल हों. कश्मीरी शादियों की दावत में खिलाए जाने वाले खानों को वाज़वान कहा जाता है, जिसमें बड़े सलीके और प्यार से एक से बढ़कर एक नॉनवेज डिश बनाकर परोसी जाती हैं. वाज़वान दरअसल कोई डिश नहीं बल्कि एक पलेटर है, जिसमें कम से कम सात तरह की डिश और अधिकतम 36 तरह की डिश को शामिल किया जाता है. आइए जानते है कश्मीर की आलीशान दावत वाज़वान इतनी खास क्यों है?

Advertisement

क्या है वाज़वान शब्द का अर्थ

कश्मीरी वाज़वान आज कश्मीर की क्ववीज़ीन का चिन्ह बन चुका है. वाजा एक कश्मीरी शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'कुक' यानी खाना पकाने वाला. कश्मीरी वाज़वान के लिए जो खाना बनाता है या यूं कहें जो खाना तैयार करने वालों को ऑर्डर देता है और खाने का स्वाद चखता है उसे 'वाजा' कहते हैं. वाज़वान में दूसरा शब्द है 'वान', इसका अर्थ है दुकान. यानी कि वाजा की दुकान पर मिलने वाले पकवान.

वाजवान में शामिल होती हैं कुल 36 डिश:

कश्मीरी वाज़वान में कुल 36 डिश शामिल की जाती हैं जिसे शादी की दावत में बड़े सलीके से परोसा जाता है. शुरुआत में इसमें सिर्फ 7 डिश शामिल हुआ करती थीं लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़ती चली गईं और आज वाज़वान में कुल 36 डिश शामिल होती हैं. कश्मीर की शादियों में वाज़वान सर्व किया जाता है. इसे डिश की तादाद लोग अपने खर्च के मुताबिक रखते हैं. ये कम से कम 7 और ज्यादा से ज्यादा 36 हो सकती हैं.

Wazwan (Photo-India Today)

ऐसे होती है वाज़वान के लिए खाना पकाने की तैयारी:

अक्सर शादी में कश्मीरी वाज़वान की तैयारी के लिए एक बड़े मैदान में टैंट लगाए जाते हैं. अंगीठी, तंदूर, पीतल के बड़े-बड़े बर्तन खाना बनाने से लेकर सर्विंग प्लेट में जाने तक पूरी तैयारी यहां की जाती है. कश्मीरी वाज़वान के सभी पकवान टिंबर में पकाए जाते हैं जिससे खाना धीरे-धीरे पके और अंत में स्वाद लाजवाब निकले. वाज़वान को लड़की पर पकाया जाता है.

Advertisement

कोड वर्ड में होती हैं बातें:

वाज़वान के लिए कौन-सी चीज कैसे तैयार करनी है इसका सारा फैसला वस्ता के ऊपर होता है. वस्ता का अर्थ है 'हेडकुक'. वस्ता और खाना बना रहे उसके हेल्पर का रिश्ता काफी खास होता है. यह सारी बातें कोड वर्ड में किया करते हैं. जो बाकियों की समझ से बाहर हैं. यह सभी कोड वर्ड वाज़वान के खान पान से जुड़े होते है. कई तो वस्ता की आंखों में देखकर ही समझ जाते हैं कि किस पकवान में कब क्या करना है, क्या पक चुका है या किसमें क्या कमी रह गई.

वाजा के मुताबिक तय होती है शादी की तारीख:

कहा तो ये भी जाता है कि कश्मीर में वाजा की इतनी डिमांड है शादी की तारीख भी उसी दिन फिक्स होती है जिस दिन वाजा के पास समय होता है. वाज़वान के लिए मटन गोश्त का चुनाव की भी अच्छी परख की जाती है. वाज़वान का खाना तैयार करने के लिए भेड़ के मीट को चुना जाता है और खास बात यह है कि भेड़ के हर हिस्से से अलग-अलग तरह की डिश बनाई जाती हैं.

मीट के हर टुकड़े से बनाई जाती है खास डिश:

गर्म मीट को सबसे पहले लहसुन और अदरक में डालकर उबाला जाता है. उसके बाद मीट के टुकड़ों से पता चलता है कि कौन-कौन सी डिश तैयार होने वाली हैं. ज्यादातर भेड़ को काटने के बाद गोश्त को उल्टा लटकाया जाता है इससे स्वाद तो बढ़ता ही है साथ ही कैमिकल रिएक्शन भी सारे निकल जाते हैं हालांकि कश्मीर में इसका उल्टा है. गोश्त को तुरंत लटकाकर उसे घंटों तक कूटा जाता है.

Advertisement

कश्मीर में कैसे हुई था वाज़वान की शुरुआत:

नेटफ्लिक्स के शो राजा रसोई और कहानियों के मुताबिक माना जाता है कि कश्मीर में वाजवान बनाना 800 साल पहले शुरू किया गया था. सिल्क रूट से होकर कई साल पहले फारसी व्यापारी और कुक आए जो कई तरह के जायके अपने साथ लाए. खाना को सर्व करने का तरीका भी कश्मीर में यहीं से आया.

कश्मीर वाज़वान डिश के नाम फारसी भाषा में:

इसके अलावा यह भी माना जाता है कि 14वीं सदी में तैमूर लंग जब भारत आए तो उनके साथ में आए सिपाही, कारीगर को कश्मीर भा गया. जिसमें से कुछ लोगों ने यहां पर बसकर अपने मुल्क के खाने को बरकरार रखा जिससे वाज़वान का इजात हुआ. यखनी, तबक माज के नामों को सुनकर ऐसा कहा भी जा सकता है कि वाज़वान फारसी लेकर आए, क्योंकि यह सभी फारसी नाम हैं.

Kashmiri Trami (Photo-India Today)

खाने का तरीका भी अलग

वाज़वान की खास बात यह भी है कि इसमें सभी को साथ में खाना परोसा जाता है. जिसे कश्मीर में त्रामी कहते हैं. सबसे पहले सभी लोग जमीन पर बैठते हैं उसके बाद सभी के हाथ धुलाएं जाते हैं और फिर 1 थाली में 4 लोगों को साथ में परोसा जाता है. पूरी दावत एक साथ ही खाना शुरू करती है. इसके बाद एक शख्स एक-एक कर के सारे डिश परोसता रहता है.

Advertisement

Input from: Raja Rasoi aur Kahaniyan


 

TOPICS:
Advertisement
Advertisement