
History of omelette: सुबह की जल्दबाजी हो या रात की छोटी भूख, ऑमलेट एक ऐसा चीज है जो हर घर और गली-नुक्कड़ पर आसानी से मिल जाता है. प्रोटीन से भरपूर ऑमलेट को अक्सर लोग देसी समझ लेके हैं लेकिन क्या आप जानते हैं इसकी डिमांड विदेशों में भी काफी अधिक है. मसालेदार प्याज, मिर्च और धनिया के साथ तवे पर पकने वाला यह अंडा असल में सदियों पुराना एक ऐसा पकवान है, जो पूरी दुनिया में घूम चुका है. क्या आप जानते हैं कि जिसे हम आज 'देसी मसाला ऑमलेट' कहकर चाव से खाते हैं, उसकी शुरुआत असल में कहां से हुई थी? आइए जानते हैं, इसकी पूरी कहानी.
ऑमलेट का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है. जानकारों के मुताबिक, इसकी जड़ें प्राचीन फारस यानी आज के ईरान से जुड़ी हैं. शिकागो वफल्स के अनुसार, अंडे को फेंटकर उसमें जड़ी-बूटियां मिलाकर पकाने की कला सबसे पहले फारसी लोगों ने विकसित की थी और वे लोग इसे कुकु (Kuku) कहते थे.ये दिखने में काफी हद तक हमारे आज के ऑमलेट जैसा ही था. यहीं से यह पकवान धीरे-धीरे मध्य पूर्व के देशों से होता हुआ यूरोप और फिर पूरी दुनिया में फैला.

अंडे के इस पकवान को कई सभ्यताओं ने अपने तरीके से अपनाया, लेकिन इसे ऑमलेट (Omelette) नाम फ्रांस से मिला है. चिनो वैली रैंचर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि फ्रांसीसी शब्द अल्मेलेटे (Alemelle) से यह नाम निकला है. इसका अर्थ होता है ब्लेड या पतली परत.
16वीं शताब्दी तक आते-आते फ्रांस में इसे एक शाही व्यंजन का दर्जा मिल गया था. नेपोलियन बोनापार्ट से जुड़ी एक मशहूर कहानी भी है, जिसमें उन्होंने एक पूरे शहर के अंडे इकट्ठे करवाकर अपनी सेना के लिए एक विशाल ऑमलेट बनवाया था.
भारत में ऑमलेट का आना ब्रिटिश काल के दौरान हुआ. अंग्रेजों के खान-पान में शामिल यह सादा ऑमलेट जब भारतीय रसोइयों के हाथ लगा तो इसमें मिर्च, मसाले और बारीक कटा प्याज जुड़ गया. धीरे-धीरे यह सड़कों पर बिकने वाले स्ट्रीट फूड का हिस्सा बन गया.
आज भारतीय मसाला ऑमलेट अपनी तीखी और चटपटी रंगत की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है. भले ही इसकी उत्पत्ति विदेशी हो लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों ने इसे पूरी तरह भारतीय बना दिया है.