सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की एक अहम याचिका को स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सरकार को AAP सरकार के दौरान केंद्र और उपराज्यपाल के खिलाफ दर्ज 7 मामलों को वापस लेने की अनुमति दे दी है.
ये मामले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल (LG) के खिलाफ दायर किए थे. इन मुकदमों का संबंध दिल्ली में ‘सेवाओं पर नियंत्रण’ सहित कई संवैधानिक और प्रशासनिक मुद्दों से था.
कोर्ट ने स्वीकार की याचिका
ये मामले लंबे समय से अदालत में लंबित थे और केंद्र तथा उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच टकराव का प्रतीक बन गए थे. मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति अगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने भाजपा नीत सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर गौर किया और याचिका को स्वीकार कर लिया.
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सुनवाई के दौरान एक वकील ने यह मुद्दा भी उठाया कि आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान जिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को केस में लगाया गया था, उनका अब तक भुगतान नहीं हुआ है. इस पर सरकारी पक्ष ने आश्वासन दिया कि सभी लंबित फीस का भुगतान किया जाएगा.
दिल्ली सरकार ने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि 22 मई को दिल्ली की वर्तमान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन सात मुकदमों को वापस लेने की अपील दायर की थी. ये केस AAP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्र और उपराज्यपाल के खिलाफ संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई के तहत दाखिल किए थे.
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि भाजपा सरकार पुराने विवादों को समाप्त कर प्रशासनिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है. वहीं AAP की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.