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उस दलित लड़की की कहानी, जिसने IIT क्रैक किया, ₹15,000 नहीं थे, इलाहाबाद HC ने करवाया एडमिशन

संस्‍कृति रंजन को ₹15,000 जमा करने थे. संस्‍कृति एससी कैटगरी से है. हाईस्‍कूल में उसे 95.6 % अंक मिले थे. वहीं 12वीं में उसे 92.77 अंक प्राप्‍त किए थे. जेईई मेंस एग्‍जाम में उसे 2,062 रैंक मिली थी. एससी कैटगरी में उसकी रैंक 1469 थी.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की नेक पहल
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की नेक पहल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट में छात्रा ने की अपील
  • लखनऊ पीठ ने किया ऐतिहासिक फैसला

Dalit Girl Success Story: एक गरीब दलित लड़की जिसने अपनी काबिलियत के दम पर आईआईटी (IIT) का एग्‍जाम क्रैक किया, लेकिन उसके पास अपने एडमिशन के लिए फीस नहीं थी. ऐसे में उसने मदद के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahbad High Court) की ओर रुख किया. इस काबिल बेटी  की मदद के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ (Lucknow Bench) आगे आई.

लखनऊ पीठ ने छात्रा की 15 हजार रुपए फीस देने का फैसला किया है. दरअसल, छात्रा का एडमिशन आईआईटी (बीएचयू ) में हो गया था. उसने आईआईटी का Joint Entrance Examination (JEE) Advance परीक्षा क्रैक किया था. जिसके बाद उसे काउंसिलिंग में आईआईबीएचयू ने मैथमेटिक्‍स और कंप्‍यूटिंग कोर्स मिला था. लेकिन उसके पास फीस को लेकर पैसे नहीं थे. ऐसे में उसने हाईकोर्ट से मदद मांगी. 

एजेंसी के अनुसार, अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को आदेश दिया है कि छात्रा की मदद की जाए, अगर सीट उपलब्‍ध नहीं है तो छात्रा का अतिरिक्‍त सीट पर एडमिशन किया जाए. जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने छात्रा संस्‍कृति रंजन (Sanskriti Ranjan) की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया. दरअसल, संस्‍कृति ने अपनी याचिका में कहा था कि जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी और आईआईटी (BHU) से उसने फीस जमा करने के लिए समय मांगा था.

मेधावी है छात्रा संस्‍कृति रंजन 
संस्‍कृति ने बताया कि उसे फीस के लिए 15,000 रुपए जमा करने हैं. वह एससी कैटगरी से है. हाईस्‍कूल में उसे 95.6 % अंक मिले थे. वहीं 12वीं में उसे 92.77 अंक प्राप्‍त किए थे. जेईई मेंस एग्‍जाम में उसे 2,062 रैंक मिली थी. एससी कैटगरी में उसकी रैंक 1469 थी. संस्‍कृति ने 16 सितंबर को जेईई एडवांस के लिए आवेदन किया था, 15 अक्‍टूबर को उसने एग्‍जाम को क्रैक कर लिया था.

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इससे पहले संस्‍कृति और उसके पिता ने कई बार जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी को फीस को लेकर समय बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन उन्‍हें कोई उत्‍तर नहीं मिला. इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. छात्रा की प्रतिभा को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसके सपने को साकार किया और उसे 15 हजार रुपए देने के साथ उसकी सीट सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया. 

 

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