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कर्नाटक में 'गृह लक्ष्मी' योजना से कटे एक लाख महिलाओं के नाम

कर्नाटक सरकार ने अपनी गृह लक्ष्मी योजना से लगभग एक लाख महिलाओं को लाभार्थी सूची से हटाया है. जांच में मृत महिलाओं और नियमित आयकरदाता महिलाओं के फर्जी लाभ उठाने के मामले सामने आए. सरकार अब बायोमेट्रिक्स लागू करने पर विचार कर रही है. कांग्रेस MLC रमेश बाबू ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि योजना बंद नहीं हो रही, केवल गैर-हकदारों को हटाया जा रहा है.

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गृह लक्ष्मी' योजना से कटे करीब 1 लाख महिलाओं के नाम(Photo:ITG)
गृह लक्ष्मी' योजना से कटे करीब 1 लाख महिलाओं के नाम(Photo:ITG)

कर्नाटक सरकार ने अपनी प्रसिद्ध गृह लक्ष्मी योजना से करीब एक लाख महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिए हैं. इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा घर की महिला को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकार का कहना है कि योजना को पूरी तरह पारदर्शी और सही बनाने के लिए ये कदम उठाया गया है.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये कोई कटौती नहीं है, बल्कि योजना को व्यवस्थित किया जा रहा है. जांच में सामने आया कि कई ऐसी महिलाएं जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, उनके खातों में भी लगातार पैसे जमा हो रहे थे. इसके अलावा कई ऐसी महिलाएं जो नियमित रूप से इनकम टैक्स भर रही थीं, वे भी इस योजना का गलत लाभ उठा रही थीं. जबकि वे इसके दायरे में नहीं आती हैं.

सरकार अब इस व्यवस्था को और पक्का करने के लिए पैसे पाने वाली महिलाओं के लिए बायोमेट्रिक्स (अंगूठे या उंगली का निशान) लागू करने पर भी विचार कर रही है.

कांग्रेस MLC रमेश बाबू का विपक्ष पर जोरदार पलटवार

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य (MLC) रमेश बाबू ने सरकार का बचाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है,  उन्होंने कहा कि भाजपा को हमारी गारंटी योजनाओं पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि कर्नाटक में इस योजना को बंद नहीं किया जा रहा है. केवल उन लोगों को हटाया जा रहा है जो इसके हकदार नहीं हैं.

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विपक्ष के नेता आर. अशोक को दी खुली चुनौती

रमेश बाबू ने विपक्ष के नेता आर. अशोक पर निशाना साधते हुए उन्हें एक विफल नेता बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक के पास सरकार के खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं है.

वे केवल राजनीतिक फायदे के लिए इस बेकार के मुद्दे को तूल दे रहे हैं. रमेश बाबू ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर विपक्ष के पास कोई वास्तविक सबूत है, तो वे सोशल मीडिया पर कचरा उछालने के बजाय सीधे लोकायुक्त के पास जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

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