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बारिश से बेहाल हुआ बेंगलुरु, सड़कें जलमग्न, हॉस्पिटल की दीवार गिरने से 7 लोगों की मौत

झुलसाती गर्मी से जूझ रहे बेंगलुरु में अचानक आई बारिश और ओलावृष्टि ने राहत तो दी, लेकिन कुछ ही घंटों में शहर पानी-पानी हो गया. सड़कों पर नदी जैसा नज़ारा, सरकारी दफ्तरों में घुसा पानी और लंबे ट्रैफिक जाम ने शहर की तैयारियों की पोल खोल दी.

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ओलावृष्टि से बेंगलुरु को भीषण गर्मी से राहत, लेकिन जनजीवन अस्त-व्यस्त
ओलावृष्टि से बेंगलुरु को भीषण गर्मी से राहत, लेकिन जनजीवन अस्त-व्यस्त

बेंगलुरु में बुधवार को भारी बारिश और ओलावृष्टि ने भीषण गर्मी से परेशान लोगों को राहत तो दी लेकिन इससे जल्द ही शहर के हालात बिगड़ने लगे और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया. तेज बारिश और तूफानी हवाओं ने शहर के तापमान में काफी गिरावट देखने को मिली लेकिन इस दौरान भारी तबाही भी देखने को मिली. Bowring and Lady Curzon Hospital की चारदीवारी गिरने से एक बच्चे सहित सात लोगों की मौत हो गई.

महज दो घंटे की बारिश में ही सूखे से जूझ रहे शहर में जलभराव हो गया. रिचमंड टाउन और शांतिनगर जैसे इलाकों में कमर तक पानी भर गया, जिससे सड़कें नदी जैसी दिखने लगीं. कई स्थानों पर घंटों तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही.

अप्रत्याशित बारिश का असर सत्ता के केंद्र विधानसभा तक पहुंचा, जहां गलियारों और सरकारी दफ्तरों के अंदर पानी भर गया. कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक का कार्यालय भी जलमग्न हो गया. शाम के समय भारी बारिश होने से ऑफिस से घर लौटने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. मेट्रो सेवाओं में भी कुछ व्यवधान की खबरें सामने आईं.

प्रमुख सड़कों और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और गाड़ियां धीमी गति से चलती रहीं. कई निचले इलाकों में पानी भर गया. मल्लेश्वरम, शांतिनगर और शेषाद्रिपुरम समेत कई इलाकों में पेड़ उखड़ने की घटनाएं सामने आईं. ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के अनुसार, शहर में करीब 50 जगहों पर पेड़ गिर गए.

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हालात से निपटने के लिए दमकल और आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों को ट्रैफिक पुलिस और अन्य कर्मचारियों के साथ तैनात किया गया. जलमग्न सड़कों से पानी निकालने के लिए पंपों का इस्तेमाल किया गया और यातायात को सामान्य करने की कोशिश की गई.

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