लेबनान में इजरायल लगातार हमले कर रहा है. वहां इजरायल का एयरस्ट्राइक भी जा रही है. इस बीच खबर आ रही है कि युद्ध के ऐसे माहौल में लेबनान में भारत के सैकड़ों सैनिक मौजूद हैं. आखिर 600 से ज्यादा भारतीय सैनिक वहां कर क्या रहे हैं. चलिए जानते हैं यह पूरा माजरा क्या है?
लेबनान में आज से 48 साल पहले यानी की 1978 में शांति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक शांति सेना की तैनाती की थी. इस सैन्य टुकड़ी में कई देशों के सैनिक शामिल थे.इसका नाम लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की अंतरिम सेना यानी N Interim Force in Lebanon (UNIFIL) रखा गया.
इस शांति सेना का क्या मकसद था
संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूनिफिल) दक्षिणी लेबनान में एक शांतिरक्षा मिशन है. इसकी स्थापना यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा 1978 में 425 और 426 रेजेल्यूशन के जरिए से की गई थी. मार्च 1978 में सुरक्षा परिषद द्वारा यूनिफिल की स्थापना लेबनान से इजरायली वापसी के लिए की गई थी. इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बहाल करने और क्षेत्र में लेबनानी सरकार को उसकी प्रभावी सत्ता बहाल करने में सहायता करने के लिए की गई थी.
अभी लेबनान में कितने सैनिक हैं
यूनिफिल में लगभग 50 सैन्य योगदान देने वाले देशों से आए लगभग 8,500 शांति सैनिक हैं. इसमें से 642 सैनिक सिर्फ भारत से हैं. यूनिफिल की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 मार्च 2026 तक UNIFIL में 47 देशों के सैनिक शामिल हैं और इनकी संख्या 7 505 है. इन सैनिकों का काम लेबनान में शांति सुनिश्चित करना और इजरायल या किसी भी देश के अतिक्रमण को रोकना है.
इस सेना में सबसे ज्यादा इंडोनेशिया, इटली, भारत, घाना, फ्रांस, मलेशिया और नेपाल के सैनिक सबसे ज्यादा हैं. वहीं उरुग्वे, पेरू, मलावी, यूके, केन्या, जाम्बिया, ग्रीस, कोलंबिया, अर्मेनिया, जैसे कुछ ऐसे भी देश हैं, जिनके सिर्फ एक या दो सैनिक लेबनान में तैनात हैं.