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क्या हैं माइनस्वीपर... जिन्हें होर्मुज के पानी में छोड़ेगा अमेरिका! क्या है इनका काम?

ईरान से सफल बातचीत नहीं होने के बाद अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की बारूदी सुरंगों को हटाने का फैसला किया है. इसके लिए वह पानी में माइनस्वीपर उतारने वाला है. अब सवाल उठता है कि ये माइनस्वीपर आखिर काम कैसे करते हैं?

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बारूदी सुरंग हटाएंगे यूएस माइनस्वीपर्स (Representational Photo - Pexels)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बारूदी सुरंग हटाएंगे यूएस माइनस्वीपर्स (Representational Photo - Pexels)

इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विफल होने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का ऐलान किया है और सबसे पहले वहां समुद्र के नीचे बिछाई गई बारूदी सुरंग को अमेरिका साफ करेगा. इसके लिए वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने माइनस्वीपर को उतारेगा.   

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जो विश्व के 20% तेल परिवहन की निगरानी करता है, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बंद है. ईरान ने इस मार्ग पर पानी के नीचे की घातक माइंस और बारूदी सुरंगें बिछा दी है. ट्रंप ने रविवार को कहा कि जलक्षेत्र को साफ करने के लिए अमेरिका अपनी नौसेना और सहयोगी देशों की नौसेनाओं की मदद लेगा, ताकि माइनस्वीपर तैनात करके होर्मुज जलडमरूमध्य को साफ किया जा सके और वैश्विक व्यापार फिर से शुरू हो सके.

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज के संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स कार्यक्रम में कहा कि हमारे पास अब वहां माइनस्वीपर मौजूद हैं. हमारे पास अत्याधुनिक तकनीक से लैस पानी के भीतर चलने वाले माइनस्वीपर हैं, जो काफी मॉर्डन और सर्वश्रेष्ठ हैं. फिर भी हम ज्यादा पारंपरिक माइनस्वीपर रखेंगे.

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ट्रंप ने कहा कि मुझे पता चला है कि ब्रिटेन और कुछ अन्य देश माइनस्वीपर भेज रहे हैं. कई देशों के पास माइनस्वीपर नहीं हैं. वहीं अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने कहा कि होर्मुज  को खाली कराने का अभियान शनिवार को शुरू हो चुका है. जब दो अमेरिकी विध्वंसक पोत युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार उस जलक्षेत्र से गुजरे.

माइनस्वीपर्स से कैसे साफ होगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
सेंटकॉम ने आगे कहा कि अमेरिकी नौसेना ईरान की खदानों का पता लगाने और उन्हें आने वाले दिनों में नष्ट करने के लिए पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन तैनात करेगी. अमेरिकी सेना के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने में सक्षम कई पनडुब्बी चालित विमानन इकाइयां (यूएवी) हैं, जिनमें जनरल डायनेमिक्स द्वारा विकसित 17,000 पाउंड का नाइफफिश ड्रोन भी शामिल है.

सेंटकॉम के अनुसार, नाइफफिश यूयूवी दबी हुई माइंस और हाई अनस्टेबल वातावरण में मौजूद बारूदी सुरंगों का पता लगाने, उनका क्लासीफिकेशन करने और उनकी पहचान करने में सक्षम है.  यह हमें एक उन्नत बारूदी सुरंग-खोज की क्षमता प्रदान करता है.

सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने  में कहा कि नौसेना के पास मॉड 2 किंगफिश नामक एक मिसाइल के आकार का ड्रोन भी है, जिसमें सोनार लगा होता है और यह समुद्र तल पर संभावित खानों की खोज करता है. पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन के साथ-साथ, नौसेना के पास एमएच-60एस हेलीकॉप्टर भी हैं, जो एयरबोर्न लेजर माइन डिटेक्शन सिस्टम (एएलएमडीएस) और एयरबोर्न माइन न्यूट्रलाइजेशन सिस्टम (एएमएनएस) से लैस हैं.

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यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कभी इस देश का था कब्जा, जहाजों से खूब वसूलता था टैक्स

नौसेना के अनुसार, ये प्रणालियां हेलीकॉप्टरों को क्षेत्र में पानी के नीचे स्थित खदानों का शीघ्रता से पता लगाने और विस्फोटक को तबाह करने के लिए छोटे वारहेड से हमला करने का कमांड भी देता है. कूपर ने कहा कि आज हमने एक नया रास्ता बनाने  की प्रक्रिया शुरू कर दी है और हम जल्द ही इस सुरक्षित मार्ग को समुद्री उद्योग के साथ साझा करेंगे ताकि वाणिज्य के निर्बाध प्रवाह को प्रोत्साहित किया जा सके. 

अमेरिका ने होर्मुज को खोलने की कसम खाई है
युद्ध शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 2,000 से अधिक जहाज फंसे हुए हैं, और ईरान के साथ बातचीत के बाद प्रतिदिन केवल कुछ ही नौकाएं पार कर पाती हैं. ट्रम्प ने इस कदम को विश्वव्यापी जबरन वसूली करार देते हुए जलमार्ग को खोलने और ईरान की जवाबी कार्रवाई से खतरे में पड़े वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अमेरिकी विध्वंसक जहाजों का इस्तेमाल करने की कसम खाई.

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