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पुडुचेरी क्यों मनाता है दो बार स्वतंत्रता दिवस, वजह जानकर चौंक जाएंगे!

पुडुचेरी का नाम पहले पांडिचेरी था, जिसे 2006 में बदलकर उसके असली तमिल नाम पुडुचेरी कर दिया गया. यह नाम ‘पुडु’ (नया) और ‘चेरी’ (गांव) से मिलकर बना है. फ्रेंच और ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम बदल गया था, लेकिन बाद में भारत सरकार ने इसे उसकी मूल पहचान देने के लिए फिर से पुडुचेरी कर दिया गया.

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आज पुडुचेरी एक ऐसा शहर है जहां भारतीय संस्कृति और फ्रेंच विरासत दोनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है. ( Photo: Grok)
आज पुडुचेरी एक ऐसा शहर है जहां भारतीय संस्कृति और फ्रेंच विरासत दोनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है. ( Photo: Grok)

पुडुचेरी, केरल और असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जहां लाखों मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन कर रहे हैं. पुडुचेरी में करीब 9.50 लाख वोटर 294 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है. इसी बीच पुडुचेरी एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि यह भारत का ऐसा अनोखा केंद्र शासित प्रदेश है जहां साल में दो बार स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.  निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस चुनाव में कुल 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 ट्रांसजेंडर मतदाता वोट डालेंगे. इसके अलावा करीब 2.42 लाख प्रवासी मतदाता भी इस चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं.

दरअसल, जहां पूरा देश 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी का जश्न मनाता है, वहीं पुडुचेरी का इतिहास अलग रहा है, क्योंकि यह लंबे समय तक  फ्रांस के कब्जे में ही रहा. यही वजह है कि यहां आज भी आजादी से जुड़ी एक अलग और खास पहचान देखने को मिलती है.

फ्रांस से आजादी की कहानी
पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम जैसे इलाके फ्रांस के अधीन थे. यहां के लोगों ने भी आजादी की मांग शुरू की और धीरे-धीरे आंदोलन तेज हुआ. लंबे संघर्ष और बातचीत के बाद 1 नवंबर 1954 को फ्रांस ने इन क्षेत्रों को भारत को सौंप दिया. इस दिन को डी फैक्टो ट्रांसफर कहा जाता है, यानी असल में सत्ता भारत को मिल गई. यही कारण है कि पुडुचेरी में हर साल 1 नवंबर को भी स्वतंत्रता दिवस की तरह मनाया जाता है. इस दिन को वहां के लोग 'Liberation Day' यानी मुक्ति दिवस के रूप में मनाते हैं.

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पूरी तरह भारत का हिस्सा कब बना?
हालांकि, 1954 में प्रशासन भारत को मिल गया था, लेकिन कानूनी रूप से (de jure) पुडुचेरी पूरी तरह भारत का हिस्सा 1962 में बना, जब फ्रांस ने आधिकारिक रूप से इसे भारत को सौंपने का समझौता पूरा किया.

कैसे मनाया जाता है यह दिन?
पुडुचेरी में दोनों दिन बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं. 15 अगस्त (राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस) को झंडारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत गाए जाते हैं. वहीं,  1 नवंबर (मुक्ति दिवस) के दिन विशेष समारोह मनाया जाता है. फ्रांस से आजादी की याद में ऐतिहासिक कार्यक्रम और झांकियां निकाली जाती है. 

क्यों खास है पुडुचेरी?
पुडुचेरी आज भी अपनी फ्रेंच विरासत के लिए जाना जाता है. यहां की सड़कों, इमारतों, खानपान और संस्कृति में फ्रांस की झलक साफ दिखाई देती है. यही कारण है कि यहां आजादी का इतिहास भी अलग और खास है. पुडुचेरी का नाम पहले पांडिचेरी (Pondicherry) था, लेकिन 2006 में इसे बदलकर फिर से इसका असली और पारंपरिक नाम पुडुचेरी (Puducherry) कर दिया गया. इस बदलाव के पीछे इतिहास और संस्कृति से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है. चलिए जानते हैं. 

कैसे नाम पड़ा पुडुचेरी?
पुडुचेरी नाम तमिल भाषा से आया है. ‘पुडु’ (Pudu) का मतलब होता है – नया और ‘चेरी’ (Cheri) का मतलब होता है गांव. यानि पुडुचेरी का अर्थ है 'नया गांव'.

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फ्रेंच और अंग्रेजों ने नाम कैसे बदला?
जब 1600 के दशक में फ्रांसीसी (French) लोग यहां आए, तो उन्होंने इस नाम को अपने हिसाब से बदलकर पोंडिचेरी (Pondichery) कर दिया. बाद में अंग्रेजों ने इसे और बदलकर Pondicherry लिखना शुरू कर दिया. यानी असली नाम धीरे-धीरे विदेशी असर में बदल गया.

2006 में क्यों बदला नाम?
भारत की आजादी के बाद कई जगहों के नाम बदलने की मांग उठी, ताकि पुराने और स्थानीय नामों को वापस लाया जा सके. इसी कड़ी में अक्टूबर 2006 में संसद ने कानून पास करके ‘Pondicherry’ का नाम बदलकर ‘Puducherry’ कर दिया. यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, बल्कि यह एक तरह से अपनी संस्कृति और पहचान को वापस पाने की कोशिश थी.

पुडुचेरी से जुड़े कुछ मजेदार फैक्ट
 

  • यहां आज भी फ्रेंच भाषा आधिकारिक भाषाओं में शामिल है, साथ में तमिल, तेलुगु और मलयालम भी बोली जाती हैं.
  • शहर में आपको सड़क के नाम तमिल और फ्रेंच दोनों में लिखे मिलेंगे.
  • यहां का फ्रेंच क्वार्टर आज भी यूरोप जैसा लगता है- रंगीन इमारतें और साफ-सुथरी गलियां इसकी पहचान हैं.
  • पुडुचेरी में मशहूर ऑरोविल (Auroville) है, जो एक इंटरनेशनल टाउनशिप है जहां दुनिया भर के लोग रहते हैं.
  • श्री अरविंद आश्रम यहां का बड़ा आध्यात्मिक केंद्र है, जहां हर साल हजारों लोग आते हैं.
  • शहर के बीच में ऊंची इमारतें बनाने पर रोक है, ताकि इसकी पुरानी विरासत बनी रहे.
  • पुडुचेरी भारत का उन आखिरी इलाकों में से था जो आजादी के बाद भारत में शामिल हुए.
  • यहां की साक्षरता दर (literacy rate) काफी ज्यादा है, जो इसे देश के पढ़े-लिखे इलाकों में शामिल करती है.
  • शहर की प्लानिंग फ्रेंच स्टाइल ग्रिड सिस्टम पर आधारित है, जो भारत में बहुत कम जगह देखने को मिलता है.
  • यहां की खूबसूरत गलियां और बीच इसे फिल्म शूटिंग के लिए भी पसंदीदा जगह बनाते हैं.
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