अमेरिका अपनी आजादी के 250 साल का जश्न मना रहा था, और माहौल कुछ ऐसा था जैसे पुरानी हिस्ट्री को नई पॉलिश देकर फिर से परोसा जा रहा हो. इसी मौके पर ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स-III भी व्हाइट हाउस पहुंच गए. मतलब वो शख्स पहुंचा, जिनके पूर्वजों से आजादी लेकर ही अमेरिका आज ये पार्टी कर रहा है. अब मंच पर थे डोनाल्ड ट्रंप जो अक्सर यूरोप और ब्रिटेन पर तंज कसने से नहीं चूकते. लेकिन इस बार बाजी थोड़ी पलट गई.
डिनर के दौरान जब दोनों देश अपने “साझा इतिहास” की बातें कर रहे थे, तभी किंग चार्ल्स ने हल्की मुस्कान के साथ ऐसा तीर छोड़ा कि सब हंस पड़े. उन्होंने कहा कि 250वीं वर्षगांठ का ये जश्न उन्हें बोस्टन टी पार्टी की याद दिलाता है. बस फर्क इतना है कि उस वक्त चाय समुद्र में फेंकी गई थी और आज उसे बड़े आराम से व्हाइट हाउस में सर्व किया जा रहा है. राजा का अंदाज इतना सधा हुआ था कि तंज भी था, मजाक भी और ट्रंप भी बस मुस्कुराकर रह गए.
बताते चलें कि इतिहास के पन्नों में दर्ज एक ऐसी घटना, जिसने दुनिया की दिशा बदल दी. हम बात कर रहे हैं बोस्टन टी पार्टी की. साल था 1773… ब्रिटेन की संसद ने एक कानून पास किया- टी एक्ट. इस कानून के जरिए ईस्ट इंडिया कंपनी को अमेरिकी उपनिवेशों में सीधे चाय बेचने की इजाज़त दे दी गई. मतलब साफ था कि एकाधिकार और स्थानीय व्यापारियों के लिए बड़ा झटका. लेकिन… बोस्टन के लोगों को ये मंज़ूर नहीं था.
अब फिर से ट्रंप और चार्ल्स की गुफ्तगू पर चलते हैं. डिनर चल रहा था, माहौल शाही था, लेकिन बातों में हल्की-फुल्की तकरार का मसाला भी था. तभी ट्रंप का वही चर्चित बयान सामने आ गया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका न होता, तो आज यूरोप वाले जर्मन बोल रहे होते. इस पर किंग चार्ल्स मुस्कुराए बिना कैसे रहते. चार्ल्स ने बड़े ही नपे-तुले अंदाज़ में, चेहरे पर हल्की मुस्कान और आवाज में शरारत घोलते हुए कहा- क्या मैं ये कहने की जुर्रत कर सकता हूं कि अगर हम नहीं होते तो शायद आप आज फ्रेंच बोल रहे होते. बस फिर क्या था, टेबल पर बैठे लोग हंसी रोक नहीं पाए. ट्रंप भी समझ गए कि ये शाही जवाब था, सीधा नहीं.
फिर चार्ल्स ने 18वीं सदी के उस बड़े टकराव की याद दिलाई. उन्होंने इशारों-इशारों में बताया कि कैसे उस दौर में उत्तरी अमेरिका पर कब्जे की जंग में ब्रिटेन ने फ्रांस को पीछे धकेल दिया था. कहानी कुछ यूं है कि 1750 के दशक तक फ्रांस ने कनाडा और ग्रेट लेक्स इलाके पर मजबूत पकड़ बना ली थी, जबकि ब्रिटेन अटलांटिक तट की अपनी 13 कॉलोनियों तक सिमटा हुआ था. फिर शुरू हुई जंग और आखिरकार 1763 में फ्रांस को हार माननी पड़ी. नतीजा- कनाडा, लुइसियाना और फ्लोरिडा जैसे बड़े इलाके ब्रिटेन के हिस्से आ गए. ऐसे अंग्रेजों ने अमेरिका में फ्रेंच प्रभाव को उसी वक्त रोक दिया था.
चार्ल्स ने व्हाइट हाउस की तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा कि मैं यहां हुए नए बदलावों को नजरअंदाज नहीं कर सकता. आखिर इसके ‘रिकंस्ट्रक्शन’ में हमारा भी छोटा सा योगदान रहा है. जब ब्रिटिश सैनिकों ने 1814 में इसमे आग लगा दी थी. किंग चार्ल्स ने अपने तंज में 24 अगस्त 1814 की उस घटना की तरफ इशारा किया. जब ब्रिटिश सैनिकों ने वाशिंगटन डीसी में घुसकर व्हाइट हाउस को आग के हवाले कर दिया था. अंग्रेजों ने ऐसा करके 1812 में ब्रिटिश कॉलोनी कनाडा के यॉर्क शहर पर अमेरिकी हमले का बदला लिया था.
अब बारी ट्रंप की थी. उन्होंने मुस्कुराते हुए एक निजी किस्सा छेड़ दिया. ट्रंप ने याद किया कि उनकी स्कॉटिश मां मैरी ऐनी मैकलियोड जब युवा प्रिंस चार्ल्स को देखती थीं तो कहती थीं “देखो, छोटा चार्ल्स कितना प्यारा है!” और फिर ट्रंप ने मजाक में जोड़ दिया- “मेरी मां को चार्ल्स पर क्रश था… क्या आप यकीन कर सकते हैं?”ट्रंप ने कहा कि मेरी प्यारी मां मैरी मैकलियोड का जन्म स्कॉटलैंड के स्टोनोवे में हुआ था, जो हेब्राइड्स का हिस्सा है और यही असली स्कॉटलैंड है. इसमें कोई संदेह नहीं है.
इस पूरे किस्से का निष्कर्ष यही है कि इतिहास चाहे जितना गंभीर क्यों न हो, जब उसे कूटनीति और हास्य के साथ परोसा जाता है तो वही सबसे असरदार बन जाता है. अंत में, ये मुलाकात यही बताती है कि अमेरिका और ब्रिटेन का रिश्ता तंज, इतिहास और हंसी, तीनों का मिला-जुला रूप है. जहां एक-दूसरे पर चुटकी लेने की गुंजाइश भी है, और साथ खड़े रहने की समझ भी.