ईरान युद्ध के बीच अब गैस सप्लाई की काफी चर्चा हो रही है. कई शहरों में गैस किल्लत की खबरें आ रही हैं और केंद्र सरकार की ओर से ECA लागू होने के बाद गैस सप्लाई पर ज्यादा बात होने लगी है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर भारत में गैस कहां-कहां से आती है और किस रूट से भारत तक गैस पहुंचती है, किस तरह गैस भारत तक आती है. तो जानते हैं विदेश से भारत गैस आने का पूरा गणित...
भारत में किन देशों से आती है गैस?
भारत अपनी कुल नैचुरल गैस की आवश्यकता का करीब 50 फीसदी आयात करता है, जिसमें से 50 फीसदी से अधिक की आपूर्ति दो खाड़ी देशों कतर और यूएई से की जाती है. ये गैस होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग के माध्यम से भारत तक आती है.
पाइपलाइन नहीं है, तो कैसे आती है गैस?
सबसे पहले गैस फील्ड से गैस को Liquefaction Plant में भेजा जाता है. दरअसल, नैचुरल गैस को सीधे जहाज से भेजना संभव नहीं होता, क्योंकि उसका वॉल्यूम बहुत ज्यादा होता है. इसके लिए गैस को माइनस 162°C तक ठंडा करके तरल बनाया जाता है, जिसे LNG कहते हैं. इससे गैस का वॉल्यूम लगभग 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे जहाज से भेजना आसान हो जाता है. इसके बाद ये ट्रांसपोर्ट के लिए तैयार हो जाती है.
इसके बाद LNG को खास क्रायोजेनिक टैंकर जहाजों में भरकर समुद्र के रास्ते भारत भेजा जाता है. क्रायोजेनिक टैंक जहाज वो होते हैं, जो विशेष रूप से डिजाइन किए गए वैक्यूम-इंसुलेटेड स्टोरेज कंटेनर होते हैं. इनका इस्तेमाल बहुत कम कम तापमान (-90°C से -160°C या उससे कम) पर तरल ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, आर्गन और LNG जैसी गैसों को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है. इनके जरिए भारत तक गैस आती है और एक बार में कई हजार टन गैस एक बार में भारत तक आती है.
भारत में ये एलएनजी गैस गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में दहेज, एन्नोर, जयगढ़ जैसे टर्मिनल पर आती है. यहां एलएनजी के रुप में आई गैस को सामान्य एलपीजी गैस में बदला जाता है या यहां गैस आने के बाद उन्हें अलग अलग बॉटलिंग प्लांट तक भेजा जाता है. यहां ये सिलेंडर में पैक होकर आपके घर तक आती है.