स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जिसका भी नियंत्रण होता है, वह ग्लोबल ऑयल सप्लाई के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कंट्रोल करता है. 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से ईरान ने अमेरिका के समर्थन से शाह को सत्ता से बेदखल किया और इस्लामी गणराज्य की स्थापना के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी अपना अधिकार जताया.
इसके बाद दशकों से अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के दौरान , ईरानी शासन ने बार-बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने और वैश्विक तेल बाजार में अराजकता फैलाने की धमकी देता रहा है. आज से पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं, जब ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए इस रास्ते को बंद किया है और जहाजों को निशाना बनाया है. ऐसे में जानते हैं कब-कब ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा पैदा किया.
1979 की ईरानी क्रांति और तेहरान में अमेरिकी दूतावास में 52 लोगों के बंधक बनाए जाने के बाद ईरान के साथ अमेरिकी राजनयिक संबंध टूट गए. फिर जब 1980 में इराक के सद्दाम हुसैन ने ईरान पर आक्रमण किया, तो अमेरिका ने अपने साझा दुश्मन के खिलाफ हुसैन का समर्थन किया.
जब होर्मुज में छिड़ गया था टैंकर यु्द्ध
ईरान -इराक के बीच युद्ध आठ वर्षों तक चला. इस दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही को बाधित किया गया था. तेल टैंकर दोनों पक्षों के निशाने पर आ गए थे. 1984 में, इराक ने कुछ ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी में माइंस बिछाकर और हथियारों से लैस स्पीडबोटों से हमलाकर दिया. ईरान ने इराकी, कुवैती और सऊदी टैंकरों पर निशाना साधकर जवाबी कार्रवाई की. जिन टैंकरों को परेशान किया गया उनमें अमेरिका जाने वाले जहाज भी शामिल थे. इस तथाकथित 'टैंकर युद्ध' के दौरान, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तटस्थ टैंकरों को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए युद्धपोत भेजे.
1988 में, फारस की खाड़ी में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात नौसैनिक फ्रिगेट USS सैमुअल बी . रॉबर्ट्स एक ईरानी माइंस से क्षतिग्रस्त हो गया. अमेरिका ने ऑपरेशन प्रेइंग मैंटिस के साथ जवाबी कार्रवाई की, जो एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन था. इसके तहत ईरानी नौसेना के अधिकांश जहाजों को डुबो दिया गया या निष्क्रिय कर दिया गया. उसी वर्ष बाद में, एक अमेरिकी युद्धपोत ने गलती से ईरान एयर की फ्लाइट 655 को मार गिराया, जिसमें सवार सभी 290 नागरिक मारे गए थे. उस वक्त भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही बाधित रही थी.
सन 2000 के दशक में होर्मुज बंद करने की दी गई थी धमकी
2000 के दशक में ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया. 2008 में, ईरान ने प्रतिबंध नहीं हटाए जाने की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी दी, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने युद्ध के समान बताया. जब यूरोपीय संघ ने 2012 में ईरानी तेल पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की, तो ईरानी शासन ने फिर एक बार फिर होर्मुज को बंद करने का वादा किया, जिससे फारस की खाड़ी के देशों से तेल निर्यात बाधित हो जाए.
तब ईरान को चुनौती देते हुए, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने विमानवाहक पोत और युद्धपोत भेज दिए थे. इस वजह से ईरान उस रास्ते को बंद नहीं कर पाया था.
2010 के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता गया खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 28 अप्रैल 2015 को, ईरानी गश्ती नौकाओं ने डेनमार्क के स्वामित्व वाले कंटेनर जहाज, माएर्स्क टाइग्रिस को चेतावनी के तौर पर गोलीबारी करने के बाद जब्त कर लिया. ईरान ने दावा किया कि यह जहाज के मालिक के साथ कानूनी विवाद का हिस्सा था. 2019 में, एक ब्रिटिश ध्वज वाले तेल टैंकर को भी जब्त कर लिया गया. यह कार्रवाई कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर में ब्रिटेन के रॉयल मरीन द्वारा एक ईरानी टैंकर को रोके जाने के बदले के तौर पर की गई थी. 2024 में, ईरानी विशेष बलों ने इजरायल पर एक बड़े हमले के तहत एक तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया था.
अमेरिकी नौसेना ने 2023 में रिपोर्ट दी थी कि 2021 से ईरान ने लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को परेशान किया, उनकी आवाजाही को बाधित किया, उन पर हमले किए या उन्हें जब्त कर लिया है, जो क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक स्पष्ट खतरा पैदा करता है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी देने और बार-बार बाधित करने के दशकों बाद, ईरान ने आखिरकार 2026 में खुद पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमले के जवाब में इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया. ईरान ने यह भी घोषणा की है कि अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के लिए यह रास्ता अब बंद रहेगा. वहीं ईरान इस रास्ते पर टोल वसूलने की तैयारी भी कर रहा है.