28 मई 1937 को जर्मनी की सरकार, जो उस समय नेशनल सोशलिस्ट (नाजी) पार्टी के एडॉल्फ हिटलर के कंट्रोल में थी, उसने एक नई सरकारी स्वामित्व वाली ऑटोमोबाइल कंपनी का गठन किया. इसे उस समय गेसेलशाफ्ट ज़ुर वोरबेरेइटुंग डेस डॉयचेन वोक्सवैगन्स एमबीएच के नाम से जाना जाता था. उसी वर्ष बाद में, इसका नाम बदलकर केवल वोक्सवैगन वर्क, यानी 'जनता की कार कंपनी' कर दिया गया.
मूल रूप से नाजी संगठन, जर्मन लेबर फ्रंट द्वारा संचालित, फॉक्सवैगन का मुख्यालय जर्मनी के वुल्फ्सबर्ग में था. जर्मनी भर में ऑटोबान और सीमित पहुंच वाले राजमार्गों का जाल बिछाने के अपने महत्वाकांक्षी अभियान के अलावा, हिटलर की सबसे पसंदीदा परियोजना एक किफायती, फिर भी तेज गति वाली गाड़ी का विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन करना था. इसकी कीमत 1,000 रीच मार्क्स (उस समय लगभग $140) से कम हो.
इस 'जनता की कार' का डिजाइन तैयार करने के लिए, हिटलर ने ऑस्ट्रियाई और जर्मन ऑटोमोटिव इंजीनियर फर्डिनेंड पोर्श को बुलाया. 1938 में, एक नाजी रैली में, फ्यूहरर ने घोषणा की कि यह कार आम जनता के लिए बनाई गई है. इसका उद्देश्य उनकी परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करना है और इसका उद्देश्य उन्हें आनंद देना है.
हालांकि, 1939 में बर्लिन मोटर शो में पहली बार KDF (क्राफ्ट-ड्यूर्च-फ्रेउडे)-वैगन प्रदर्शित होने के तुरंत बाद, द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया, और फॉक्सवैगन ने उत्पादन रोक दिया. युद्ध समाप्त होने के बाद, जब कारखाना खंडहर में तब्दील हो चुका था, तो मित्र देशों ने जर्मन ऑटो उद्योग को पुनर्जीवित करने के अपने प्रयासों का केंद्र बिंदु फॉक्सवैगन को बनाया.
अमेरिका में वोक्सवैगन की बिक्री शुरुआत में दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में धीमी थी, जिसका कारण कार का ऐतिहासिक नाजी संबंध, छोटा आकार और असामान्य गोल आकृति थी. 1959 में, विज्ञापन एजेंसी डॉयल डेन बर्नबैक ने एक ऐतिहासिक अभियान शुरू किया, जिसमें कार को 'बीटल' नाम दिया गया और इसके छोटे आकार को उपभोक्ताओं के लिए एक विशिष्ट लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया.
अगले कुछ वर्षों में, वोक्सवैगन अमेरिका में सबसे अधिक बिकने वाली आयातित कार बन गई. 1960 में, जर्मन सरकार ने वोक्सवैगन के 60 प्रतिशत शेयर जनता को बेच दिए, जिससे कंपनी का राष्ट्रीयकरण समाप्त हो गया. बारह साल बाद, बीटल ने 1908 से 1927 के बीच फोर्ड मोटर कंपनी की प्रसिद्ध मॉडल टी द्वारा स्थापित 15 मिलियन वाहनों के लंबे समय से चले आ रहे विश्वव्यापी उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
1935 से बीटल के डिजाइन में अपेक्षाकृत कोई बदलाव नहीं हुआ था, जिसके चलते 1970 के दशक की शुरुआत में इसकी बिक्री धीमी पड़ गई. वीडब्ल्यू ने रैबिट और बाद में गोल्फ जैसे स्पोर्टी मॉडल पेश करके वापसी की. 1998 में, कंपनी ने अपने पूर्ववर्ती मॉडल का उत्पादन जारी रखते हुए, बहुचर्चित "न्यू बीटल" की बिक्री शुरू की. लगभग 70 वर्षों और 21 मिलियन से अधिक यूनिट्स के उत्पादन के बाद, अंतिम मूल बीटल 30 जुलाई, 2003 को मेक्सिको के प्यूब्ला कारखाने से बनकर निकली.