अक्सर जब हम दिल्ली घूमने जाते हैं, तो अजमेरी गेट का नाम सुनते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि जब अजमेर राजस्थान में है, तो फिर दिल्ली में इस जगह का नाम अजमेरी गेट क्यों रखा गया.यह सवाल सुनने में भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे एक लंबा और दिलचस्प इतिहास छिपा हुआ है, जो हमें दिल्ली के पुराने दौर और उसकी बनावट के बारे में बताता है.
पुरानी दिल्ली और उसके दरवाजे
आज की आधुनिक दिल्ली पहले ऐसी नहीं थी. मुगलों के समय में दिल्ली एक दीवारों से घिरा हुआ शहर हुआ करता था, जिसे शाहजहानाबाद कहा जाता था. इस शहर को शाहजहां ने 17वीं सदी में बसाया था. उस समय शहर की सुरक्षा के लिए चारों तरफ ऊंची दीवार बनाई गई थीं और इन दीवारों में कई बड़े-बड़े दरवाजे बनाए गए थे. इन दरवाजों को गेट कहा जाता था और हर गेट का नाम उस दिशा या उस रास्ते के आधार पर रखा गया था, जहां से वह खुलता था.
अजमेरी गेट का नाम कैसे पड़ा?
अजमेरी गेट भी उन्हीं दरवाजों में से एक था. इस गेट का नाम अजमेरी इसलिए पड़ा, क्योंकि यह दरवाजा उस दिशा में खुलता था, जहां से राजस्थान के अजमेर शहर की ओर जाने वाला रास्ता जाता था. यानी अगर कोई व्यक्ति इस गेट से बाहर निकलता था, तो वह रास्ता आगे चलकर अजमेर की ओर जाता था. इसी वजह से इस दरवाजे का नाम अजमेरी गेट रखा गया.
पुराने समय में रास्तों की पहचान
आज के समय में हम GPS और मैप्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं था. पुराने समय में शहरों के गेट ही रास्तों की पहचान होते थे. लोग इन गेट्स के नाम से समझ जाते थे कि किस दिशा में कौन सा शहर या इलाका है. जैसे:
कश्मीरी गेट- कश्मीर की दिशा
लाहौरी गेट - लाहौर की दिशा
और अजमेरी गेट - अजमेर की दिशा
इस तरह ये गेट सिर्फ एंट्री गेट नहीं थे, बल्कि यात्रा और व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग भी थे.
व्यापार और यात्राओं का मुख्य रास्ता
अजमेरी गेट से होकर गुजरने वाला रास्ता बहुत महत्वपूर्ण माना जाता था. इस रास्ते से व्यापारी, यात्री और कारवां गुजरते थे. राजस्थान के अजमेर और आसपास के इलाकों से सामान लेकर लोग दिल्ली आते थे और यहां से दूसरे शहरों तक व्यापार करते थे. इसलिए यह गेट व्यापारिक दृष्टि से भी काफी अहम था.
अजमेर का धार्मिक महत्व
अजमेर सिर्फ एक शहर ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है. यहां अजमेर शरीफ दरगाह स्थित है, जो सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है.पुराने समय में दिल्ली से कई लोग अजमेर शरीफ की यात्रा के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते थे. इस वजह से भी अजमेरी गेट का नाम और महत्व बढ़ गया.
आज का अजमेरी गेट
आज के समय में अजमेरी गेट पुरानी दिल्ली का एक व्यस्त इलाका बन चुका है. यह जगह अब ट्रैफिक, बाजार और भीड़-भाड़ के लिए जानी जाती है. हालांकि अब शहर की दीवारें और पुराने दरवाजों का महत्व पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन उनका ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार है. अजमेरी गेट आज भी हमें उस पुराने दौर की याद दिलाता है, जब दिल्ली एक दीवारों से घिरा हुआ शहर था.