इंकलाब जिंदाबाद... भले ही सिर्फ जो लफ्ज हों लेकिन इनमें जज्बात करोड़ों लोगों के थे. इनके मायने थे हमेशा क्रांति जिंदा रहे. अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में यह नारा खूब बुलंद हुआ. यही इंकलाब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की जुबान पर उस वक्त भी था जब उन्होंने 8 अप्रैल 1929 को असेंबली में बम फेंका था.