मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत तक महसूस किया जाने लगा है. गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राज्य सरकार ने कहा है कि अगर एलपीजी की कमी गहराती है तो व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा.
एजेंसी के अनुसार, इस संबंध में राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मौजूदा हालात किसी संकट से कम नहीं हैं. उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं और इसका सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. ऐसे में गैस की कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
इसी संभावित स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है. वन मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड वन विकास निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वह पर्याप्त मात्रा में लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि जरूरत पड़ने पर होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान गैस के विकल्प के तौर पर इसका उपयोग कर सकें.
राज्य सरकार का मानना है कि अगर गैस की आपूर्ति अचानक प्रभावित होती है तो व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में पहले से वैकल्पिक व्यवस्था रखना जरूरी है, ताकि कारोबारियों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े.
दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. खास तौर पर तेल और गैस की ढुलाई के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है. इस वजह से भारत को मिलने वाली गैस आपूर्ति में भी बाधा आई है.
यह भी पढ़ें: अयोध्या में ईरान युद्ध की आंच! गैस किल्लत के कारण 'राम रसोई' पर लगा ताला, हनुमानगढ़ी के लड्डू प्रसाद पर संकट
भारत अपनी कुल गैस खपत का लगभग आधा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. देश में प्रतिदिन करीब 191 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस की खपत होती है, जिसमें से बड़ी मात्रा विदेशों से आती है. लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वहां से आने वाली करीब 60 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं.
इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं. हाल ही में गैस आवंटन को लेकर एक नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें घरेलू रसोई गैस, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस को प्राथमिकता दी गई है. इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से गैस डायवर्ट की जा सकती है.
ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि घरेलू जरूरतों और परिवहन क्षेत्र को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है. ऐसे में उद्योगों और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों को गैस आपूर्ति में कटौती का सामना करना पड़ सकता है.
समस्या का अस्थाई समाधान बन सकती है लकड़ी
यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार ने समय रहते विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है. अगर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को गैस की कमी का सामना करना पड़ता है, तो लकड़ी अस्थायी समाधान बन सकती है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल आपात स्थिति के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था है. सरकार की कोशिश यही है कि गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहे और लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं और गैस आपूर्ति पर असर पड़ता है, तो राज्य सरकार की यह तैयारी व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है.