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उत्तराखंड: राज्यपाल-सीएम की एक ही गति, कोई भी 5 साल का कार्यकाल नहीं कर सके पूरा

बेनी रानी मौर्य ने उत्तराखंड की राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया है. उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर जिस तरह से कोई भी दूसरा मुख्यमंत्री अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है, उसी तरह सूबे में किसी भी राज्यपाल ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया. पिछले दो दशकों में राज्य को सात गवर्नर मिले हैं.

उत्तराखंड के गवर्नर पद से बेबी रानी मौर्य ने दिया इस्तीफा उत्तराखंड के गवर्नर पद से बेबी रानी मौर्य ने दिया इस्तीफा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बेबी रानी मौैर्य ने राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया
  • उत्तराखंड में अभी तक कुल सात राज्यपाल बने हैं
  • राज्य में एक भी राज्यपाल पांच साल नहीं रह सका

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने बुधवार को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. बेनी रानी मौर्य उत्तराखंड की राज्यपाल के तौर पर 26 अगस्त को ही तीन साल का कार्यकाल पूरा की थीं. पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने गवर्नर का पद छोड़ दिया है. उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर जिस तरह से कोई दूसरी मुख्यमंत्री अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका, उसी तरह सूबे में किसी भी राज्यपाल ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया. 

बता दें कि उत्तराखंड का गठन हुए दो दशक से ज्यादा का समय हो गया है. 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से काटकर अलग राज्य बनाया गया था. पिछले 21 सालों में उत्तराखंड को सुरजीत बरनाला से लेकर बेनी रानी मौर्य तक सात गवर्नर मिले, लेकिन इनमें से एक भी राज्यपाल ने अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया. राज्य में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल के रूप में सुदर्शन अग्रवाल करीब चार साल तक रहे. 

उत्तराखंड के बनने के साथ ही सबसे पहले राज्यपाल के रूप में सुरजीत सिंह बरनाला ने कुर्सी संभाली. बरनाला नौ नवंबर 2000 से सात जनवरी 2003 तक उत्तराखंड के राज्यपाल रहे. इस तरह से वह दो साल दो महीने ही उत्तराखंड के गवर्नर रहे.

बरनाला की जगह सुदर्शन अग्रवाल को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया. अग्रवाल 8 जनवरी 2003 से 28 अक्तूबर 2007 तक राज्य के गवर्नर रहे. सुदर्शन अग्रवाल उत्तराखंड में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल के रूम में पदस्थ रहे. वे करीब पौने चार साल अपने पद पर रहे. 

सुदर्शन अग्रवाल के बाद बनवारी लाल जोशी को उत्तराखंड के गवर्नर के तौर पर नियुक्त किया गया. जोशी 29 अक्तूबर 2007 से 5 अगस्त 2009 तक राज्य के गवर्नर रहे. इस तरह से उन्होंने दो साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया.  बीएल जोशी की जगह मार्गरेट अल्वा उत्तराखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं. उन्होंने 6 अगस्त 2009 को गवर्नर पद की शपथ ली और 14 मई 2012 तक रहीं. 

मार्गरेट अल्वा के बाद अजीज कुरैशी उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया. कुरैशी 15 मई 2012 को उत्तराखंड के गवर्नर के तौर शपथ ली और 08 जनवरी 2015 तक इस पद रहे. इसके बाद केंद्र की सत्ता परिवर्तन के चलते अजीज कुरैशी को राज्यपाल के पद से इस्तीफा देना पड़ा. अजीज कुरैशी की जगह कृष्ण कांत पॉल को गवर्नर नियुक्त किया गया. पॉल ने 8 जनवरी 2015 को उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में कुर्सी संभाली और 25 अगस्त 2018  तक इस पद पर रहे. इस तरह से साढ़े तीन साल तक उनका कार्यकाल रहा.  

केके पॉल की जगह 2018 में बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड की राज्यपाल बनी. राज्य में दूसरी महिला गवर्नर के रूप में बेबी रानी मौर्य ने 26 अगस्त 2018 को शपथ ली और 08 सितंबर 2021 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. हाल ही में उन्होंने 3 साल का कार्यकाल पूरा किया जबकि दो साल के कार्यकाल बाकी था. ऐसे में अब प्रदेश के नए राज्यपाल की जिम्मेदारी किसे मिलेगी यह तस्वीर अभी साफ नहीं है. 

हालांकि, तीन दिन पहले नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद से ही उनके इस्तीफा देने की चर्चाएं तेज होने लगी थीं. उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चाएं है. गवर्नर से पहले बेबी रानी मौर्य आगरा की मेयर रह चुकी हैं. वो  दलित समाज से हैं. इसीलिए ये कयास लगाये जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटरों को गोलबन्द करने के काम में लगा सकती है. 

 

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