उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उसे देखकर यही लगता है कि पार्टी के बड़े नेताओं के बीच सियासी पारा एकदम हाई हो गया है. सारा बवाल शुरू हुआ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक सोशल मीडिया पोस्ट से, जिसमें उन्होंने 'राजनीतिक व्रत' पर जाने का इशारा कर दिया. दरअसल, चर्चा है कि पार्टी में कुछ नई जॉइनिंग हुई, लेकिन रावत के करीबी संजय नेगी की एंट्री नहीं हो पाई. बस, इसी बात से नाराज होकर उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने या 'मौन व्रत' जैसा संकेत दे दिया, जिसने पूरी कांग्रेस में हलचल मचा दी.
जैसे ही हरीश रावत का यह बयान आया, पार्टी के दूसरे दिग्गज नेता और चुनाव समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत मैदान में उतर आए. उन्होंने बिना नाम लिए एक बड़ा बयान दे दिया कि किसी को भी यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि पार्टी किसी एक इंसान के बिना नहीं चल सकती. उनका यह कहना मानो जलती आग में घी डालने जैसा था. इसके बाद तो बयानों की ऐसी बौछार हुई कि पार्टी की अंदरूनी कलह सड़क पर आ गई.
हरक सिंह रावत के इस तंज पर धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने कड़ी आपत्ति जताई. धामी, जो हरीश रावत के कट्टर समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर हरक सिंह रावत को जमकर खरी-खरी सुनाई. धामी ने पुरानी यादें ताज़ा करते हुए 2016 की उस घटना का जिक्र किया जब कांग्रेस की सरकार गिर गई थी. उन्होंने इसे हरक सिंह रावत का 'पाप' बताया और साफ कह दिया कि ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बात यहीं नहीं रुकी, धामी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो सामूहिक इस्तीफा भी दिया जा सकता है.
इस पूरे ड्रामे के बीच हरक सिंह रावत भी चुप नहीं बैठे. उन्होंने एक बार फिर चुटकी लेते हुए कहा कि,'मौन व्रत पर जाने से पहले भी प्रेस नोट जारी किया जा रहा है.' उनका इशारा सीधे तौर पर हरीश रावत की तरफ था, जो अपनी हर बात सोशल मीडिया या प्रेस के जरिए जनता तक पहुंचाते हैं.
कुल मिलाकर स्थिति यह है कि उत्तराखंड कांग्रेस के ये बड़े सूरमा आपस में ही उलझ गए हैं. एक तरफ हरीश रावत का 'व्रत' वाला दांव है, तो दूसरी तरफ हरक सिंह रावत और हरीश धामी के बीच की तीखी जंग. कोई भी समझ सकता है कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर सब ठीक है वाला माहौल तो बिल्कुल नहीं है.