विकसित उत्तराखंड 2026 में योगगुरु बाबा रामदेव ने उत्तराखंड को ग्लोबल हेल्थ सेंटर बनाने से लेकर मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर अपनी बेबाक राय रखी.
उत्तराखंड सरकार के चार वर्षों पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने कहा, "उत्तराखंड एक पावन आध्यात्मिक नगरी है और यहां की वायु में देवत्व का वास है. यहां प्राकृतिक संपदा का अपार भंडार है. एक आध्यात्मिक गुरु होने के नाते मेरा मानना है कि विश्वभर के लोगों को उत्तराखंड से जोड़ने के लिए अभी काफी कार्य किया जाना है.
उन्होंने आगे कहा, हमें ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी, जिससे हम दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को यहां आकर्षित कर सकें. उत्तराखंड में स्विट्जरलैंड जैसा विकसित राज्य बनने की पूरी क्षमता है और हमें इसी दिशा में प्रयास करने होंगे. यहां न केवल औद्योगिक विकास की संभावनाएं हैं, बल्कि उत्तराखंड 'ग्लोबल हेल्थ हब' बनने की सामर्थ्य भी रखता है. यहां उपलब्ध दुर्लभ औषधियों के माध्यम से बीपी, शुगर और अन्य गंभीर बीमारियों का सफल उपचार संभव है."
हर की पौड़ी की चर्चा करते हुए रामदेव ने कहा कि हर तरफ फैली गंदगी और अव्यवस्था को देखकर मन अत्यंत व्यथित होता है. वहां निर्धनों की झोपड़ियां हों, लेकिन वो भी एक गरिमापूर्ण स्वरूप में होनी चाहिए. घाटों पर उड़ती हुई पन्नियां और चारों ओर बिखरा कूड़ा-कचरा इस पवित्र स्थान की छवि को धूमिल करता है. अगर कुंभ के पावन अवसर पर पतंजलि को सेवा का अवसर प्राप्त होता है. तो हम स्वयं के संसाधनों और निजी व्यय से हर की पौड़ी का कायाकल्प करने की कोशिश कर रहे हैं.
मिडिल ईस्ट तनाव पर क्या बोले रामदेव
मिडिल ईस्ट के हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, "वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका और इजरायल की नीतियों ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है. मेरा दृष्टिकोण किसी विशेष देश के पक्ष में नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के पक्ष में है, जो लोग जाति, क्षेत्र और धर्म के नाम पर दूरियां पैदा करते हैं, वे केवल समाज को गुमराह कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आगे कहा, "ट्रंप जैसे नेता अक्सर अपनी कट्टर नीतियों और विवादास्पद कार्यशैली के कारण चर्चा में रहते हैं, लेकिन विश्व शांति के लिए व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है."
मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और उस पर भारत के रुख की सराहना करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, जब दो पक्षों के बीच संघर्ष की स्थिति हो, तो अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना ही बुद्धिमत्ता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संवेदनशील समय में जो संतुलित विदेश नीति अपना रखी है, वह प्रशंसनीय और राष्ट्रहित में है. मैं भारत सरकार के इस विवेकपूर्ण स्टैंड की सराहना करता हूं.