ईरान-अमेरिका युद्ध की आशंका के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल के बीच देश में एलपीजी को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बनती दिख रही है. कई जगह लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. ऐसे ही संकट से विश्व प्रसिद्ध पर्यटक नगरी नैनीताल भी इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है.
दरअसल, घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से शहर की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है. खासकर मल्लीताल क्षेत्र में कई रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटी-छोटी खानपान की दुकानें गैस की कमी के कारण बंद होने लगी हैं. पर्यटन सीजन से ठीक पहले पैदा हुए इस संकट ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों के साथ-साथ उन सैकड़ों परिवारों की चिंता भी बढ़ा दी है, जिनकी रोजी-रोटी इन दुकानों पर निर्भर है. कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
रेस्टोरेंट और ढाबे बंद होने के कगार पर
उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में शामिल नैनीताल में सड़क किनारे मौजूद कई ढाबे और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य बंद होने की कगार पर हैं. होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिक सरकार से गैस आपूर्ति बहाल करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनका कारोबार चल सके और उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियां बची रह सकें.
कारोबारियों का कहना है कि लंबे समय तक गैस की आपूर्ति बाधित रहने से पर्यटन उद्योग पर भी असर पड़ेगा. इससे शहर की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों पर संकट गहरा सकता है.
होटल एसोसिएशन ने प्रशासन से लगाई गुहार
होटल एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी लगातार सरकारी अधिकारियों से गैस आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगा रहे हैं. वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी इस मामले में उच्च स्तर से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो नैनीताल का पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
दरअसल, ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के युद्ध के बीच गैस सप्लाई के संकट को देखते हुए सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई को पूरी तरह बंद कर दिया है.
इसी कारण नैनीताल के साथ-साथ रामनगर, मुक्तेश्वर और हल्द्वानी में भी होटल और रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर हैं या बंद हो चुके हैं. इस स्थिति से क्षेत्र में रोजगार का भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है और स्थानीय कारोबारी समाधान की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं.