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'सोशल मीडिया से दूर रहो और...', नैनीताल HC की 'मोहम्मद दीपक' को फटकार

कोटद्वार में धार्मिक विवाद के दौरान चर्चा में आए दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने कहा कि वो अनावश्यक रूप से सोशल मीडिया में शामिल न हों और जांच में पुलिस के साथ सहयोग करें. 28 जनवरी को दर्ज मामले की जांच अभी चल रही है और आगे की कार्रवाई तय होगी.

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मोहम्मद दीपक को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली (Photo: ITG)
मोहम्मद दीपक को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली (Photo: ITG)

उत्तराखंड के कोटद्वार में उपजे धार्मिक विवाद के केंद्र में आए दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक को उत्तराखंड हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली. न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को स्पष्ट हिदायत दी कि वो अनावश्यक रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शामिल न हों और जांच में पुलिस के साथ पूरा सहयोग करें.

गुरुवार को हुई सुनवाई में दीपक कुमार की तरफ से कहा गया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे पर पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. इसके बजाय पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया. घटना में शामिल लोगों के नाम बताने के बावजूद उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया. दीपक ने अपनी याचिका में पुलिस की निष्क्रियता और परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी.

हाईकोर्ट ने मोहम्मद दीपक को राहत देने से किया इनकार

सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि घटना के समय दीपक कुमार भीड़ को शांत करने के लिए मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने भीड़ के साथ धक्का-मुक्की की. इसके बाद पुलिस ने दीपक कुमार और 22 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसकी जांच अभी चल रही है. इस बीच, घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ पांच मुकदमे पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं.

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मामले में वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि दीपक कुमार ने नाम बदलने की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुकान 30 साल से अधिक पुरानी है. जब भीड़ ने उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक बताया. यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वायरल होने के बाद दीपक को लोगों का समर्थन मिला और उन्हें छोटे-छोटे चंदे मिलने लगे, जो 100 से 500 रुपये तक थे.

सोशल मीडिया से दूर रहने और पुलिस सहयोग की हिदायत

28 जनवरी को इसी घटना के बाद दीपक कुमार और उनके सहयोगी के खिलाफ दुर्व्यवहार, मोबाइल फोन छीनने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया. दीपक कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले में मुकदमा निरस्त करने, परिवार की सुरक्षा और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की.

20 मार्च को लंबी सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जांच में सहयोग करना अनिवार्य है और सोशल मीडिया में अनावश्यक गतिविधियों से जांच प्रभावित हो सकती है. याचिकाकर्ता को निर्देश दिए गए कि वो सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट या टिप्पणी न करें.

वहीं, घटना को लेकर सोशल मीडिया पर जो चर्चा और समर्थन मिला था, उससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई. दीपक कुमार के समर्थन में कुछ लोगों ने चंदा दिया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच और कानून की प्रक्रिया किसी तरह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए.

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पुलिस जांच जारी, सभी पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं

कोटद्वार विवाद ने राज्य और देश में धार्मिक तनाव को लेकर भी सवाल खड़े किए. हालांकि दीपक कुमार ने कहा कि उनका मकसद भीड़ को शांत करना और स्थिति को नियंत्रित करना था. पुलिस की जांच अब पूरे मामले की गंभीरता से कर रही है और दोनों पक्षों के ब्योरे जुटाए जा रहे हैं.

अभी जांच पूरी होने और पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बार-बार कहा कि जांच में सहयोग करना उनकी जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया गतिविधि से मामले को प्रभावित न होने दें.

दीपक कुमार की याचिका और हाईकोर्ट के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि विवादित घटनाओं में सोशल मीडिया का प्रभाव कितना बढ़ सकता है. मामले की जांच पूरी होने तक कानून और पुलिस की प्रक्रिया सबसे अहम रहेगी.

राज्य प्रशासन और हाईकोर्ट की निगरानी में मामला

इस बीच, कोटद्वार के लोग और राज्य के नागरिक इस विवाद की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन ने भी सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है ताकि स्थिति नियंत्रित रहे। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब दीपक कुमार को अपनी गतिविधियों में सावधानी बरतनी होगी और जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा.

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मामला अब उच्च न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है और पुलिस रिपोर्ट के आने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी. दीपक कुमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज मामले की जांच पूरी होने तक सभी पक्षों से सूचनाएं और बयान लिए जाएंगे.
 

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