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हमीरपुर के 1,000 साल पुराने कल्पवृक्ष का होगा संरक्षण, शास्त्रों में बताया है मनोकामना पूरी करने वाला

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार हमीरपुर जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित हजार साल पुराने प्राचीन, ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व के "कल्पवृक्ष" का संरक्षण करेगी. शास्त्रों और पुराणों में कल्पवृक्ष को मनोकामना पूरी करने वाला बताया जाता है.

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हमीरपुर का कल्पवृक्ष (फाइल फोटो)
हमीरपुर का कल्पवृक्ष (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1,000 साल से खड़ा है यमुना किनारे कल्पवृक्ष
  • 100 साल से ज्यादा पुराने वृक्षों का होगा संरक्षण

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार हमीरपुर जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित हजार साल पुराने प्राचीन, ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व के "कल्पवृक्ष" का संरक्षण करेगी. शास्त्रों और पुराणों में कल्पवृक्ष को मनोकामना पूरी करने वाला बताया जाता है.

100 साल से ज्यादा पुराने वृक्षों का होगा संरक्षण
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सौ साल से ज्यादा पुराने प्राचीन वृक्षों को संरक्षित करने की योजना बनाई है. इसी योजना के तहत हमीरपुर जिले से एक मात्र इस कल्प वृक्ष का नाम संरक्षित करने के लिये भेजा गया है.

पुराणों -शास्त्रों में मिलता है जिक्र
हमीरपुर जिले के डीएफओ ने बताया कि यह पौराणिक महत्व का वृक्ष है. समुद्रमंथन से निकले इस वृक्ष को इंद्र भगवान को दिया गया. बाद में भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा के मांगने वह इसे स्वर्ग से धरती पर लेकर आए. 

1,000 साल से खड़ा है यमुना के तीरे
हमीरपुर जिले में यमुना नदी के तट पर ऐतिहासिक कल्पवृक्ष 1,000 साल से सीना ताने खड़ा है. यह लोगों के श्रद्धा और आस्था का केंद्र है. लोगों का मानना है कि इस अलौकिक पेड़ के दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. श्रद्धालु इस पेड़ के तने में धागा बांधकर अपनी मन्नतें मांगते हैं. श्रद्धालु यहां दूर-दराज से आते हैं. 

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क्या कहते हैं पर्यावरणविद
इस कल्प वृक्ष के बारे में पर्यवरणविदों का कहना है कि इस प्राचीन पेड़ का आकार हाथी की तरह है. इसकी जड़ें हाथी के पैर की तरह हैं. इसका तना और छाल भी हाथी की खाल की तरह होता है और इसका बायोटिक नाम ओलिया कसपी डाटा है जो मुख्य रूप से अफ्रीका में पाया जाता है.

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