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भरत मिलाप पर कोरोना का ग्रहण, काशी में टूट जाएगी 477 साल पुरानी परंपरा

आयोजकों का कहना है कि बिहार चुनाव में बड़ी-बड़ी रैलियां हो रही हैं, लेकिन रामलीला और भरत मिलाप के लिए अनुमति नहीं दी जा रही. हम जुलूस तक नहीं निकालने को तैयार हैं. प्रशासन आयोजन की अनुमति दे दे, जिससे परंपरा न टूटे.

नाटी ईमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप देखने उमड़ती है लाखों की भीड़ (फाइल फोटो) नाटी ईमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप देखने उमड़ती है लाखों की भीड़ (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भरत मिलाप के लिए प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
  • नाटी ईमली में होता है आयोजन, जुटते हैं लाखों
  • कोरोना के कारण प्रशासन ने नहीं दी इजाजत

अध्यात्म की नगरी काशी यानी वाराणसी को लेकर एक कहावत है- 'सात वार में नौ त्यौहार.' लक्खा मेले भी वाराणसी की पहचान रहे हैं, लेकिन कोरोना की महामारी के दौर में सैकड़ों साल पुरानी परंपराओं पर भी ग्रहण लग रहा है. अब नाटी ईमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप भी कोरोना के कारण इस साल आयोजित नहीं होगा. जिला प्रशासन ने कोरोना के खतरे को देखते हुए आयोजन के लिए इजाजत नहीं दी. 477 साल में ऐसा पहली बार होगा, जब भरत मिलाप आयोजित नहीं होगा.

नाटी ईमली में भरत मिलाप का आयोजन दशहरा के अगले दिन यानी एकादशी को होता आया है. भरत मिलाप देखने लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. प्रभु राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का मिलाप देखने के लिए उमड़ने वाली यही लाखों की भीड़ इसबार आयोजन में बाधक बन गई. भरत मिलाप कराने वाले चित्रकूट रामलीला के व्यवस्थापक मुकुंद उपाध्याय बताते हैं कि इस लीला की शुरुआत विक्रम संवत 1600 में हुई. वर्तमान में विक्रम संवत 2077 चल रहा है. इस साल लीला के आयोजन का 477वां साल था.

उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है कि इस लीला को देखने खुद सभी देवता स्वर्ग से धरती पर उतरते हैं. इस लीला की शुरुआत रामचरित मानस के रचयिता तुलसी दास के समकालीन और उनके मित्र मेधा भगत ने की थी. कहा जाता है कि जब तुलसी दास का निधन हो गया, मेधा भगत दुखी होकर अयोध्या चले गए. मेधा भगत सरयू किनारे बैठे थे, तब राजकुमारों जैसे दिखने वाले कुछ बच्चे उनके पास खेलते हुए आए और धनुष-बाण देकर चले गए. मेधा भगत तीन दिन तक वहीं बैठकर इंतजार करते रहे, लेकिन वे बच्चे फिर नहीं आए. मेधा भगत को स्वप्न में संदेश मिला कि काशी जाकर चित्रकूट नामक स्थान से रामलीला की शुरुआत करो. भरत मिलाप के दिन भगवान राम के दर्शन प्राप्त होंगे.

मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि भरत मिलाप के दिन मेधा भगत को प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए और इसके बाद उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया. उन्होंने कहा कि पौने पांच सौ साल के इतिहास में अब तक कई महामारियां और बाधाएं आईं, लेकिन इस लीला का आयोजन कभी नहीं रुका. कोरोना के चलते सार्वजनिक आयोजनों पर रोक है, इसलिए इस बार भरत-मिलाप में भगवान के दर्शन से श्रद्धालु वंचित रह जाएंगे. उन्होंने कहा कि रामलीला स्थगित नहीं रह सकती, इसलिए शहर के लोहटिया स्थित अयोध्या भवन से ही भरत मिलाप सहित सारी लीलाएं संपन्न होंगी, जिसमें आम लोगों का प्रवेश वर्जित है.

उपाध्याय ने इस पल को कष्टकारी बताया और रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार चुनाव में बड़ी-बड़ी रैलियां हो रही हैं, लेकिन रामलीला और भरत मिलाप के लिए अनुमति नहीं दी जा रही. उन्होंने कहा कि हम जुलूस तक नहीं निकालने को तैयार हैं, बस प्रशासन आयोजन की अनुमति दे दे जिससे परंपरा न टूटे. उपाध्याय के मुताबिक उनकी मांग न सरकार सुन रही है और ना ही प्रशासन.

 

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