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ग्राउंड रिपोर्ट: UP के कासगंज में भी बुखार का प्रकोप, 5 की मौत, झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे जनता!

पश्चिम उत्तर प्रदेश के  फिरोजाबाद में जहां डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं तो आसपास के जिलों में बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है. कासगंज के सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवनींद्र कुमार के मुताबिक इलाके में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है.

कासगंज में भी बुखार का प्रकोप है. कासगंज में भी बुखार का प्रकोप है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पैथोलॉजी लैब भी उठा रहे बेबसी का फायदा
  • स्वास्थ्य विभाग भेज रहा टीमें
  • कासगंज में अबतक पांच लोगों की मौत

पश्चिम उत्तर प्रदेश के  फिरोजाबाद में जहां डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं तो आसपास के जिलों में बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है. कासगंज के सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवनींद्र कुमार के मुताबिक इलाके में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि इनमें से किसी की मृत्यु डेंगू के चलते दर्ज नहीं की गई है.

डॉ. अविनेंद्र सिंह एसीएमओ कासगंज बताते हैं कि जिले में पांच मौतें हो चुकी हैं. यहां वायरल फीवर मलेरिया के चलते लोगों की मौत हुई है, जिसमें एक दिव्यांग और एक महिला शामिल हैं. बचाव को लेकर नगर पालिका और नगर पंचायत, ग्रामीण क्षेत्रो में छिड़काव और फॉगिंग कराई जा रही है.

झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे जनता!

बुखार के प्रकोप की पड़ताल के लिए 'आजतक' कासगंज के ग्रामीण इलाकों में पहुंचा. मजबूरी, बेबसी और सरकार की निष्क्रियता लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे छोड़ चुकी है. सोरों प्रमुख बाज़ार पर कई कथित डॉक्टरों की दुकान मिल जाएगी जहां बुखार से ग्रस्त लोगों को लिक्विड फ्लोएड सलाइन के जरिए चढ़ाया जा रहा है. पास के गांव जलालपुर से आए मदन की पत्नी को भी बुखार ठीक करने के लिए लिक्विड चढ़ाया जा रहा है. दूसरे मरीजों को भी दवाइयां इंजेक्ट की जा रही हैं लेकिन डॉक्टर क्लीनिक से नदारद थे. डॉक्टर की जगह जो शख्स मौजूद था उसने कहा डॉक्टर साहब कहीं चले गए हैं. 

आपदा में अवसर ढूंढते कथित डॉक्टरों की लापरवाही की हद गजब की है. छोटे से कमरे में तीन से चार मरीजों का एक साथ इलाज चल रहा है. किसी को प्लेटलेट गिरने की शिकायत है तो किसी को तेज बुखार. बड़े शहरों की ओर या निजी अस्पतालों तक न पहुंच पाने वाले गांव की गरीब आबादी इन्हीं डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दी गई है.

सोरों बाज़ार में एक किनारे दुकान चला रहे खुद को बीएएमएस डॉक्टर बताने वाले डॉ मुकेश कहते हैं कि बच्चों की संख्या ज्यादा है जिनमें बुखार की शिकायत है और हर दिन बड़ी संख्या में लोग बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं. एक मरीज उन्हें बुधवार को ऐसा भी मिला जिसमें प्लेटलेट गिरने की आशंका हैं, और सैंपल इकट्ठा करके आगे भेजा जा रहा है. डॉ मुकेश कहते हैं कि वह आयुर्वेदाचार्य हैं और उन्हें कुछ एलोपैथिक दवाइयां देने की अनुमति है. 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर

यहां के हालात ऐसे हैं कि चारों और मरीजों का ढेर है और सबके हाथ में सलाइन की बोतल लगी हुई है. हर किसी को डी एन एस नाम का मेडिकल फ्लूएड इंजेक्ट कर दिया है. स्थानीय लोगों के आरोपों की पड़ताल करने के लिए आजतक की टीम सोरों इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंची. यहां मरीजों की भीड़ दिखाई पड़ी. लेकिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों का बयान ग्रामीणों के आरोपों के विपरीत है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी में मरीजों को देखने वाले डॉक्टर अमित का कहना है कि हाल ही में एक मरीज ऐसा आया था जो निजी इलाज करवा रहा था और आगे इलाज के लिए उसे रेफर करना पड़ा. डॉ अमित का कहना है कि कई बार लोग ऐसे डॉक्टरों से इलाज करवाकर स्थिति बदतर होने के बाद ही सरकारी केंद्रों तक पहुंच रहे हैं. 

पैथोलॉजी लैब भी उठा रहे बेबसी का फायदा

आपदा के समय पैथोलॉजी लैब भी बेबसी का फायदा उठाते नजर आ रहे हैं. यहां के एक पैथोलॉजी लैब में कागजों में डाटा एंट्री में भी गड़बड़ी है तो टेस्टिंग को लेकर नियमों में भी हेरफेर. चिकित्सा अधिकारी ने जब पूछा कि जिन लोगों को 6 सितंबर को एंटीजन पॉजिटिव टेस्टिंग रिपोर्ट दी गई, उनकी फाइनल टेस्टिंग क्यों नहीं हुई तो लेबोरेटरी कर्मचारी ने कहा कि शायद पीड़ित कहीं और चले गए होंगे.
 

टेस्टिंग की अनियमितता तो छोड़ दीजिए कागज पर एंट्री देखकर सर चकरा जाएगा. पैथोलॉजी लैब वाले अलग ही गणित अपना चुके हैं. एक पन्ने पर एक से लेकर 32 की गिनती है तो दूसरे पन्ने पर 34 से लेकर 64 तक. कहते हैं बीच की गिनती हम नहीं रखते. चिकित्सा अधिकारी ने यह आश्वासन दिया कि इस मामले में अब जांच की जाएगी और अगर यह दोषी पाए गए तो लैबोरेट्री सील की जाएगी.

स्वास्थ्य विभाग भेज रहा टीमें
महामारी ने विकराल रूप लेना शुरू किया तो स्वास्थ्य विभाग ने गांव-गांव चिकित्साकर्मियों की टीम भेजनी शुरू कर दी है. यह टीमें टेस्टिंग भी कर रही है और दवाइयां भी दे रही हैं. यहां के गणेशपुर में कैंप लगा दिया गया है. स्वास्थ्यकर्मी डॉक्टर आरबी सिंह का कहना है कि बुधवार से शुरू हुए कैंप में दोपहर तक 70 लोगों के टेस्ट हो चुके हैं, लेकिन किसी में भी डेंगू या मलेरिया कंफर्म नहीं हुआ जबकि बुखार की शिकायत ज्यादातर लोगों में है. लोगों को दवाइयां दी जा रही है. 

 

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