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योगी के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी-सपा के बीच बराबरी पर रही लड़ाई, निर्दलीय बने किंगमेकर 

गोरखपुर में कुल 68 जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 868 उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे थे. अभी तक के जिला पंचायत के चुनावी नतीजे में सपा और बीजेपी से कहीं ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है जबकि सपा-बसपा को बराबर सीटें मिली हैं. इस बार गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य है, जिसमें निर्दलीयों की भूमिका काफी अहम होगी. 

सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी आदित्यनाथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जिला पंचायत में निर्दलीय सबसे ज्यादा जीते
  • गोरखपुर में बीजेपी को 20 सीटों पर मिली जीत
  • सपा ने गोरखपुर में 19 सीटों पर जीत दर्ज की

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में जिला पंचायत चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच कांटे का मुकाबला रहा है. गोरखपुर में कुल 68 जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 868 उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे थे. अभी तक के जिला पंचायत के चुनावी नतीजे में सपा और बीजेपी से कहीं ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है जबकि सपा-बसपा को बराबर सीटें मिली हैं. इस बार गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य है, जिसमें निर्दलीयों की भूमिका काफी अहम होगी. 

गोरखपुर जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कुल 68 वार्डों में प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया था, जिनमें बीजेपी और एसपी के बीच कड़ा मुकाबला दिखा. जिले की 20 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की तो वहीं सपा के 19 प्रत्याशियों ने जीत का दावा किया है. इसके अलावा बसपा दो और कांग्रेस-आम आदमी पार्टी और निषाद पार्टी ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की है. वहीं, 24 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का दावा किया है. 

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की पुत्रवधू और वर्तमान में कैंपियरगंज से विधायक फतेह बहादुर सिंह की पत्नी साधना सिंह 7310 वोटों से विजयी हुई हैं. वहीं, सपा के जिला अध्यक्ष की भाभी आरती साहनी एड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद अपना चुनाव हार गई हैं. हालांकि, सपा नेता अवध नारायण यादव जीतने में सफल रहे हैं. इस बार जिस तरह से निर्दलीय उम्मीदवारों ने भारी संख्या में जीत दर्ज की है, उसके चलते जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव काफी अहम और महत्वपूर्ण हो गया है. 

बता दें कि साल 2015 में गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई थी. इसकी वजह से इस पद को हासिल करने की इच्छा रखने वाले कई दिग्गज नेताओं को मन मसोसकर रह जाना पड़ा था. बीजेपी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था, जिसके लिए चलते सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले मनुरोजन यादव की पत्नी गीतांजलि ने यहां से जीत का परचम लहराया था. 

हालांकि, सपा के ही दो कद्दावर नेताओं के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए जोरदार टक्कर हुई थी. तत्कालीन विधायक विजय बहादुर यादव ने अपने भाई अजय बहादुर को चुनाव मैदान में उतारा था. जबकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले मनुरोजन यादव के पक्ष में स्थानीय नेताओं ने मोर्चा खोल दिया था.

अन्य राजनीतिक दलों ने पीछे से गीतांजलि यादव को ही सपोर्ट किया. इसका परिणाम रहा कि काफी पसीना बहाने के बावजूद विजय बहादुर यादव के भाई अजय बहादुर यादव को हार का सामना करना पड़ा. गीतांजलि यादव गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं. ऐसे में इस बार देखना होगा कि जिला पंचायत की कुर्सी पर किसका कब्जा होता है. हालांकि साधना सिंह के जीतने के साथ ही उनकी दावेदारी प्रमुख रूप से मानी जा रही है. 


 

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