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ईवीएम से छेड़खानी के मायावती के आरोप में है कितना दम?

ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में एक कंट्रोल यूनिट होती है. एक बैलट यूनिट और 5 मीटर की केबल. ये मशीन 6 वोल्ट की बैटरी से भी चलाई जा सकती है. मतदाता को अपनी पसंद के कैंडिडेट के आगे दिया बटन दबाना होता है और एक वोट लेते ही मशीन लॉक हो जाती है. इसके बाद सिर्फ नए बैलट नंबर से ही खुलती है. एक मिनट में ईवीएम में सिर्फ 5 वोट दिए जा सकते हैं.

माया के आरोपों में कितना दम? माया के आरोपों में कितना दम?

यूपी चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. बीएसपी सुप्रीमो समायावती ने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कह दिया कि नतीजे उनकी समझ के परे हैं और ईवीएम में छेड़खानी हुई है. सोशल मीडिया पर भी ये जोक पहले ही वायरल हो रहा था कि ईवीएम में कोई भी बटन दबाओ बीजेपी को ही वोट जाता है. सवाल ये है कि क्या वाकई ईवीएम में छेड़खानी संभव है? इस सवाल का जवाब तलाशने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर ईवीएम काम कैसे करती है.

ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में एक कंट्रोल यूनिट होती है. एक बैलट यूनिट और 5 मीटर की केबल. ये मशीन 6 वोल्ट की बैटरी से भी चलाई जा सकती है. मतदाता को अपनी पसंद के कैंडिडेट के आगे दिया बटन दबाना होता है और एक वोट लेते ही मशीन लॉक हो जाती है. इसके बाद सिर्फ नए बैलट नंबर से ही खुलती है. एक मिनट में ईवीएम में सिर्फ 5 वोट दिए जा सकते हैं.

ईवीएम मशीनें बैलट बॉक्स से ज्यादा आसान थीं, उनकी स्टोरेज, गणना आदि सब कुछ ज्यादा बेहतर था इसलिए इनका इस्तेमाल शुरू हुआ. लगभग 15 सालों से ये भारतीय चुनावों का हिस्सा बनी हुई है. लेकिन ईवीएम मशीनें काफी असुरक्षित भी होती हैं.

क्या-क्या हैं ईवीएम के खतरे और किन-किन देशों में बैन कर दी गई हैं ये मशीनें पढ़ें पूरी खबर -

 

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