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UP में जाति की राजनीति में अब 'कायस्थों' की एंट्री, बीजेपी के खिलाफ लगे पोस्टर

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लुभाने के लिए अभी मूर्ति पॉलिटिक्स खत्म नहीं हुई थी कि लखनऊ में पोस्टर पॉलिटिक्स की शुरुआत हो गई. लखनऊ के कई जगहों पर कायस्थ समाज को लेकर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें कायस्थ समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग उठाई गई है.

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कायस्थ समुदाय को लेकर लगाए गए पोस्टर
कायस्थ समुदाय को लेकर लगाए गए पोस्टर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्राह्मण के बाद अब कायस्थ राजनीति गर्म
  • BJP संगठन में कायस्थों को नहीं मिली जगह
  • कायस्थ BJP के परंपरागत वोटर माने जाते हैं

उत्तर प्रदेश में भले ही अभी विधानसभा चुनाव होने में करीब डेढ़ साल का समय बचा हो, लेकिन राजनीतिक पार्टियां सियासी समीकरण बनाने में जुटी हैं. सूबे में इन दिनों जातिगत राजनीति दिन-ब-दिन नया मोड़ ले रही है, जिसके चलते जातिवाद की राजनीति अपने चरम पर है. ब्राह्मणों को लुभाने के लिए अभी मूर्ति पॉलिटिक्स खत्म नहीं हुई थी कि लखनऊ में पोस्टर पॉलिटिक्स की शुरुआत हो गई. लखनऊ के कई जगहों पर कायस्थ समाज को लेकर होर्डिंग्स पर पोस्टर लगाई है और प्रतिनिधित्व की मांग उठाई गई है. 

कायस्थ समाज के लगाए पोस्टर में लिखा गया है, 'कायस्थों अब तो जाग जाओ,या फिर हमेशा के लिए सो जाओ.' वहीं आगे व्यंग मारते हुए यह भी लिखा गया है, 'नवगठित भाजपा कार्यकारिणी में किसी भी कायस्थ को जगह न देने के लिए राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार.' एक दूसरे पोस्टर पर लिखा हुआ है, 'बीजेपी को धन्यवाद पार्टी के बंधुआ वोटर कायस्थ साज को कोई स्थान न देने के लिए.' कायस्थ समुदाय बीजेपी का परपंरागत वोटर माना जाता है. इससे पहले कभी कायस्थ समुदाय ने इस तरह से पोस्टर लगाकर अपने प्रतिनिधत्व की मांग नहीं की है. ऐसे में यह बीजेपी के लिए चिंता का सबब बन गया है. 

दरअसल, बीजेपी ने हाल में यूपी में अपने संगठन की कार्यकारिणी का गठन किया है, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेगी. बीजेपी ने सूबे के संगठन में 16 उपाध्यक्ष,16 प्रदेश मंत्री और 5 महामंत्री बनाए हैं, लेकिन एक भी कायस्थ समुदाय के शख्स को संगठन में शामिल नहीं किया गया है और न ही कोई दायित्व सौंपा गया है. हालांकि, बाद में क्षेत्रीय अध्यक्ष के पद पर बीजेपी ने काशी प्रांत से एक कायस्थ को जरूर शामिल किया है. 

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बीजेपी पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप

बीजेपी के परंपरागत वोटर माने जाने वाले कायस्थ समुदाय को संगठन में जगह न देने पर विपक्ष को मौका मिल गया है. विपक्ष ने बीजेपी पर कायस्थ का वोट लेकर उसे सियासत में किनारे करने की राजनीति करने के आरोप लग रहे है. अभी हाल ही में विपक्षियों द्वारा बीजेपी पर ब्राह्मण विरोधी और ठाकुरवाद की राजनीति करने का योगी सरकार पर आरोप लगा. सपा, कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी इन दिनों योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी और ठाकुर हितैशी सरकार करार देने में जुटी है. यहां तक कि कई बीजेपी विधायक भी इसपर मुखर दिख रहे हैं.

सूबे में जिस तरह से मायावती पर जाटववाद और अखिलेश यादव पर यादववाद के आरोप लगते थे. वैसे ही अब यूपी में बीजेपी पर ठाकुरों की पार्टी होने और ठाकुरवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा है. ऐसे में कायस्थ समुदाय के पोस्टर बीजेपी के लिए चिंता का सबब बन गया है. 

वहीं, बीजेपी के मीडिया पैनललिस्ट नवीन श्रीवास्तव कहते हैं कि विरोधी दलों के द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं. यूपी में तीन चुनाव हारने के बाद विपक्षी दल हताश और निराश हैं, ऐसे में वो ओछी राजनीति पर उतर आए हैं. बीजेपी हमेशा कायस्थों का सम्मान करने का काम किया है. सूबे में चार विधायक और एक मंत्री कायस्थ समुदाय से हैं. इसके अलावा तीन जिला अध्यक्ष और तीन प्रवक्ता भी कायस्थ समुदाय से हैं. इसके अलावा केंद्रीय संगठन और सरकार में कायस्थ समुदाय की अच्छी खासी भागेदारी है. इस तरह से यह कहना है कि कायस्थों को जगह नहीं दी गई यह सरासर अनुचित है. बंगाली कायस्थों की बात करें तो बीजेपी बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर त्रिपुरा के सीएम तक शामिल हैं.

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सूबे में करीब 3 फीसदी कायस्थ वोटर है, जो मौजूदा समय में बीजेपी के साथ मजबूत के साथ जुड़ा हुआ है. गोरखपुर, वाराणसी, बनारस और इलाहाबाद सहित तमाम यूपी के बड़ों शहरों में कायस्थ समुदाय का अच्छा खासा वोट है, जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है. एक दौर में कायस्थ कांग्रेस के साथ हुआ करता था, लेकिन राम मंदिर आंदोलन से बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है. ऐसे में संगठन में शामिल न करने से विपक्ष के हाथ एक बड़ा मुद्दा लग गया है. 

विकास दुबे एनकाउंटर के बाद से ब्राह्मण राजनीति गर्म

बता दें उत्तर प्रदेश का सियासी समीकरण पूरी तरह से जातियों की गोलबंदी पर टिका हुआ है. बीजेपी 2017 में सवर्ण समुदाय के साथ-साथ पिछले वोटर्स को साधकर सत्ता के वनवास को खत्म कर सकी थी. ऐसे में विपक्ष एक बार जातीय की बुनियाद पर योगी सरकार को सत्ता से बेदखल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद से ब्राह्मण राजनीति काफी गर्म है. विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी की योगी सरकार पर जातिवाद राजनीति करने का आरोप लगाकर घेरना शुरू कर दिया है. 

विपक्ष में मौजूद सभी पार्टियां एक सुर में आरोप लगा रही हैं कि यूपी में सिर्फ ठाकुरों और ठाकुरवाद का ही बोलबाला है और ब्राह्मणों की हत्या और शोषण किया जा रहा है. इस कड़ी में सपा ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए लखनऊ में भगवान परशुराम की मूर्ति लगाने का ऐलान किया तो बसपा ने हर जिले में प्रतिमा लगाने का वादा किया. वहीं, कांग्रेस की नजर ब्राह्मण मतदाताओं पर है. कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के साथ बराबर की तरजीह के साथ विधानमंडल दल की नेता आराधना शुक्ला को खड़ा किया है. कांग्रेस ने वाराणसी से सांसद रहे राजेश मिश्रा को पूर्वांचल के ब्राह्मणों को जोड़ने के काम में लगाया गया है. वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह इन दिनों योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी करार देने में जुटे हैं. 

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