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यूपी चुनाव से पहले एक्टिव हुए मुस्लिम संगठन, शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की आज लखनऊ में बैठक

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक लखनऊ के मदरसा सुल्तानुल मदारिस में होगी, जिसमें बोर्ड के सभी सदस्यों को बुलाया गया है. माना जा रहा है कि बैठक में यूपी की जनसंख्या नियंत्रण नीति सहित मुसलमानों से जुड़े हुए मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा अगले साल 2022 में होने वाले चुनाव को लेकर भी शिया पर्सनल लॉ बोर्ड सदस्य चर्चा करेंगे.

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक (फाइल फोटो) शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिया पर्सनल लॉ बोर्ड 2022 चुनाव को लेकर एक्टिव
  • शिया पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम मुद्दों पर चर्चा करेगा
  • यूपी में 20 फीसदी मुसलमान काफी अहम माने जाते हैं

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. एक तरफ सियासी पार्टियां अपने-अपने जातीय समीकरण साधने की कवायद में जुटी हैं तो दूसरी तरफ देश की बड़ी धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं भी एक्टिव नजर आने लग गई हैं और चुनावी मंथन शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड सोमवार को लखनऊ में बड़ी बैठक करने जा रही है, जिसमें मुसलमानों से जुड़े हुए मुद्दों पर चर्चा होगी. 

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक लखनऊ के मदरसा सुल्तानुल मदारिस में होगी, जिसमें बोर्ड के सभी सदस्यों को बुलाया गया है. माना जा रहा है कि बैठक में यूपी की जनसंख्या नियंत्रण नीति सहित मुसलमानों से जुड़े हुए मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा अगले साल 2022 में होने वाले चुनाव को लेकर भी शिया पर्सनल लॉ बोर्ड सदस्य चर्चा करेंगे. ऐसे में शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है. 

लखनऊ में होने वाली शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की इस बैठक में इस्लामिक किताब कुरान की तौहीन करने वाले लोगों का धार्मिक और सामाजिक रूप से बॉयकॉट करने का भी एलान किया जा सकता है. 

बता दें कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी को लेकर सुन्नी समुदाय ही नहीं बल्कि शिया समुदाय भी सख्त नाराज है. खासकर वसीम रिजवी के द्वारा कुरान की आयत को हटाने की मांग को लेकर यह नाराजगी बताई जा रही है. शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के यासूब अब्बास वसीम रिजवी की तुलना सलमान रुशदी से कर चुके हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कहा था कि वसीम रिजवी हमेशा कुरान के खिलाफ गलत बयानबाजी करते हैं और इस्लाम को बदनाम करने का काम करते हैं. 

वहीं, देश के बड़े मुस्लिम संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी ने पिछले दिनों एक अहम बयान जारी करते हुए लोगों से चुनाव में अपना वोट समझदारी से इस्तेमाल करने की नसीहत दी थी. 

राबे हसनी नदवी ने अपने जारी किये हुए बयान में कहा था कि देश में लोकतंत्र है और हर किसी को अपना वोट अपनी समझ के हिसाब से देने का हक़ है. इसके लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड किसी भी राजनीतिक पार्टी की हिमायत नहीं करता है. ऐसे में लोगों को पूरा हक है कि वे अपने हिसाब से अपना वोट दें. 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले भी कई बार अवाम से यह बात साफ कर चुका है कि अवाम खुद सोच समझ कर वोट दे और अपने इलाके के सबसे अच्छे और सही इंसान को वोट दें ताकि लोगों को सहूलियत हासिल हों और अवाम की दिक्कतें दूर हो सकें. 

दरअसल, सियासी जमातों को मुसलमानों के मुद्दों की फिक्र हो या महज दिखावा, लेकिन उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही यूपी के मुस्लिम वोट पर कई छोटी-बड़ी पार्टियों की नजर है. इसमें सपा, बसपा से लेकर कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी शामिल है. आबादी के लिहाज से यूपी में 20 फीसदी मुस्लिम वोट काफी अहम माना जाता है.

सियासी  तौर पर से यूपी में मुसलमानों का वोट काफी निर्णायक भूमिका में रहता है ऐसे में कई बड़ी छोटी पार्टियां देश की बड़ी मुस्लिम संस्थाओं से उम्मीद करती हैं कि मुसलमानों का वोट उनकी पार्टी को हासिल हो जाए. इसी के सबब देश की बड़ी मुस्लिम संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के बाद अब शिया पर्सनल लॉ बोर्ड भी 2022 चुनाव को लेकर बैठक करने जा रहा है. 

 

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