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एक ही 'सियासी नाव' पर अखिलेश-प्रियंका सवार, निषाद समाज किसका लगाएगा बेड़ा पार?

यूपी में निषाद समुदाय को साधने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. एक ही 'सियासी नाव' पर सवार होकर दोनों सियासी मंझधार पार करना चाहते हैं. हालांकि, निषाद समुदाय यूपी के 2022 के विधानसभा चुनाव में किसके साथ खड़ा होगा यह तो वक्त ही बताएगा. 

निषाद समुदाय के बीच प्रियंका गांधी निषाद समुदाय के बीच प्रियंका गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस टूटी नावों के लिए देगी 10 लाख रुपये की मदद
  • अखिलेश ने सत्ता में आने पर नई नावें देने का किया वादा
  • यूपी में 5 फीसदी है निषाद समुदाय की आबादी

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों प्रयागराज नया सियासी आखड़ा बनता जा रहा है. सूबे के निषाद समुदाय को साधने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है, लेकिन एक ही 'सियासी नाव' पर सवार होकर दोनों सियासी मंझधार पार करना चाहते हैं. हालांकि, निषाद समुदाय यूपी के 2022 के विधानसभा चुनाव में किसके साथ खड़ा होगा यह तो वक्त ही बताएगा. 

अखिलेश-प्रियंका एक ही सियासी नाव पर सवार 

प्रयागराज के बसवार गांव में पिछले दिनों यूपी पुलिस ज्यादती का शिकार हुए निषाद समुदाय के पीड़ितों से मुलाकात कर प्रियंका गांधी उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कवायद करती दिखीं. उन्होंने पीड़ित निषादों की लड़ाई में हर तरह से साथ निभाने का वायदा किया और अब उनकी टूटी हुई नाव के लिए 10 लाख की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. वहीं, प्रियंका गांधी के दौरे के दूसरे दिन प्रयागराज पहुंचे अखिलेश यादव ने टूटी नावों की मरम्मत के लिए मदद का हाथ बढ़ाया और सरकार में आने पर नई नाव देने का वादा किया है. 

दरअसल, माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम में डुबकी लगाने के बाद प्रियंका गांधी अरैल घाट पर नाव पर सवार हो गई थीं. प्रियंका ने नाव चला रहे झूंसी के छतनाग निवासी नाविक कुलदीप निषाद से पतवार लेकर अपने हाथ में थाम ली और निषाद समाज की दिक्कतों को लेकर चर्चा की. इस दौरान कुलदीप ने बताया कि 2019 में बालू खनन में नाव के प्रयोग पर प्रतिबंधित किए जाने से तमाम निषाद समुदाय के लोग बेरोजगार हो गए हैं. 

प्रियंका की वापसी के बाद अवैध खनन की शिकायत पर यूपी पुलिस ने वहां पर पहुंचकर निषाद समुदाय की कुछ नावें तोड़ दी थीं और निषाद समुदाय के कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी थी. इस बात को लेकर कुलदीप निषाद ने प्रियंका गांधी को फोन कर इस संबंध में बताया, जिसके बाद वो दोबारा से रविवार को प्रयागराज पहुंची थीं. मछुआरे समाज के लोगों से उन पर हुए पुलिस अत्याचार के बारे में बातचीत करेंगी और उनको न्याय दिलाने का प्रयास करेंगी. इसी के बाद सोमवार सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रयागराज का दौरा करके निषाद समुदाय के जख्मों पर मरहम लगाने की कवायद की है. 

यूपी की सियासत में निषाद समुदाय 
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. सपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी की नजर सूबे के निषाद समुदाय के वोटों पर है. यूपी की सियासत में निषाद समुदाय के तहत काची, बिंद, मल्लाह और कश्यप जैसी जातियां शामिल हैं, जो अति पिछड़ा समुदाय में आता है. बीजेपी इन्हीं अति पिछड़ा वोटर के सहारे 14 साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने में कामयाब रही है. यूपी में करीब 5 फीसदी निषाद समुदाय हैं, यूपी के दो दर्जन जिलों में इनकी प्रभावी संख्या है. ये बीजेपी के परंपरागत वोटर्स माने जाते हैं. इसी वोटबैंक पर अब को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच शह-मात का खेल जारी है. 

कांग्रेस-सपा निषाद समुदाय को साधने में जुटीं

प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा कि सूबे भर में निषाद समुदाय के मुद्दे पर कांग्रेस नदी अधिकार यात्रा निकालेगी. उन्होंने कहा है कि नदी के संसाधनों पर प्राथमिक हक निषादों का है. ऐसे में बालू खनन के लिए निषादराज कोऑपरेटिव सोसायटी का गठन किया जाए. साथ ही प्रियंका ने कहा कि प्रयागराज में निषाद परिवारों की नाव तोड़ी गई है, पार्टी सबको संयुक्त रूप से 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद  करेगी. 

वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा था कि निषाद समुदाय की जो नाव तोड़ी गई, उन्हें मारा-पीटा गया और रोजीरोटी छीन ली गई. सपा इन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है. अखिलेश ने दावा किया कि घटना की जानकारी होने पर सबसे पहले सपा का प्रतिनिधमंडल लोगों से मिलने उनके गांव बसवार गया. नावों की मरम्मत के लिए सपा ने मदद की है और सत्ता में आने पर नई नाव दी जाएगी. 

किसके साथ जाएगा निषाद समाज?

बता दें कि  प्रियंका गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब सक्रिय राजनीति में कदम रखा था तो उन्होंने मल्लाह समुदाय को सियासी संदेश देने के लिए प्रयागराज से काशी तक की बोट यात्रा भी की थी. हालांकि, उन्हें इस यात्रा का लोकसभा चुनाव में सियासी लाभ नहीं मिल सका था, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए अब कांग्रेस पार्टी मल्लाह समुदाय को जोड़ने के लिए खास प्लान बना रही है तो सपा भी निषाद समुदाय के जरिए सियासी मंझधार पार करना चाहती है, लेकिन निषाद समुदाय किसके साथ खड़ा होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. 

 

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