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प्रयागराज बना यूपी का सियासी अखाड़ा: प्रियंका गांधी की नजर निषाद वोटों पर तो अखिलेश देंगे मुस्लिमों को संदेश

प्रयागराज के जरिए कांग्रेस पूरे पूर्वांचल में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति अपना रही है. पिछले दस दिनों के अंदर दो बार प्रयागराज का दौरा करके राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद करती नजर आई है. वहीं, अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी सोमवार को प्रयागराज दौरे पर पहुंच रहे हैं. प्रियंका रविवार को निषाद समुदाय के बीच रहीं तो अखिलेश मुस्लिम समुदाय के साथ रहेंगे. 

प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रियंका गांधी निषाद समुदाय को साधने में जुटीं
  • अखिलेश अपने कोर वोटबैंक को साधने में जुटे
  • यूपी में कांग्रेस निषादों के मुद्दे पर पदयात्रा करेगी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी प्रयागराज को सियासी केंद्र बनाने में जुट गई हैं. प्रयागराज के जरिए कांग्रेस पूरे पूर्वांचल में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति अपना रही है. पिछले दस दिनों के अंदर दो बार प्रयागराज का दौरा करके राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद करती नजर आई है. वहीं, अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी सोमवार को प्रयागराज दौरे पर पहुंच रहे हैं. प्रियंका रविवार को निषाद समुदाय के बीच रहीं तो अखिलेश मुस्लिम समुदाय के साथ रहेंगे. 

माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम में डुबकी लगाने के बाद प्रियंका गांधी रविवार को दोबारा से प्रयागराज पहुंची थीं. प्रयागराज के बसवार गांव में पुलिस ज्यादती का शिकार हुए निषाद समुदाय के पीड़ितों से मुलाकात कर प्रियंका उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कवायद करती दिखीं. इस मौके पर उन्होंने पीड़ित निषादों से हमदर्दी जताई और उनकी लड़ाई में हर तरह से साथ निभाने का वायदा किया. 

वहीं, अब अखिलेश यादव प्रयागराज में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी के सरोजिनी नायडू मार्ग स्थित निवास पर पार्टी और मुस्लिम समुदाय के चुनिंदा लोगों से मुलाकात कर अपने समीकरण को मजबूत करने की कोशिश करेंगे. सूबे में 22 फीसदी मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस की भी नजर है, जिसके लिए प्रियंका गांधी तमाम कवायद में जुटी हैं. ऐसे में अखिलेश यादव अपने परपरागत वोटों को किसी भी सूरत में पार्टी से दूर नहीं देना चाहते हैं. 

सपा की नजर मुस्लिम वोटों पर
सलीम शेरवानी यूपी के बदायूं से भले ही पांच बार सांसद रहे हैं, लेकिन प्रयागराज में उनका पैतृक आवास है. केंद्रीय स्वास्थ्य और विदेश राज्यमंत्री पद पर भी रह चुके शेरवानी ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था, लेकिन 90 के दशक में सपा में शामिल हो गए थे. इसके बाद 2009 में सपा छोड़कर कांग्रेस में आए और तीन चुनाव लड़े और अब फिर अखिलेश की साइकिल को मजबूत करने में जुट गए हैं. सपा में वापसी करने के लिए अखिलेश के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ती जा रही हैं. 

अखिलेश की हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन दिनों सलीम शेरवानी बगल में बैठे दिखते हैं, जिसके चलते माना जा रहा है कि सपा उन्हें मुस्लिम चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा रही है. सपा का मुस्लिम चेहरा रहे आजम खान जेल में बंद हैं और उनकी छवि कट्टर मुस्लिम नेता के तौर पर रही है. बीजेपी सूबे में जिस तरह से हिंदुत्व कार्ड खुलकर खेल रही है और अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया है. इसके चलते सपा हार्डकोर मुस्लिम राजनीति को अब खुलकर खेलने से बच रही है और हाल के दिनों में सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर अखिलेश यादव चलते हुए दिखे हैं. 

कांग्रेस छोड़कर सपा में आए सलीम शेरवानी की इमेज हार्डकोर मुस्लिम नेता की नहीं रही है बल्कि वो साफ सुथरी छवि वाले नेता माने जाते हैं. यही वजह है कि अखिलेश इन दिनों सलीम शेरवानी के जरिए मुस्लिम मतों को साधने का दांव चल रहे हैं. रामपुर में आजम खान के परिवार से अखिलेश मिलने गए थे तो उनके साथ सिर्फ सलीम शेरवानी ही थी. इसी कड़ी में अखिलेश उनके प्रयागराज आवास पर पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे. माना जा रहा है इस बैठक में शेरवानी ने कुछ खास चुनिंदा मुस्लिम नेताओं को बुलाया है, जिनके साथ सपा प्रमुख 2022 के चुनाव को लेकर मंथन करेंगे. साथ ही कुछ नेताओं को सदस्यता भी दिलाएंगे. 

निषाद वोटों पर कांग्रेस की नजर

सपा की नजर मुस्लिम वोटों पर है तो निषाद समुदाय को कांग्रेस साधने में जुटी है. यूपी की सियासत में निषाद समुदाय के वोट काफी अहम माने जा रहे हैं. यही वजह है कि कांग्रेस सूबे भर में निषाद समुदाय के मुद्दे पर योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए एक यात्रा का प्लान बना रही है. यूपी की सियासत में करीब 6 फीसदी निषाद समुदाय हैं, जो बीजेपी के परंपरागत वोटर्स माने जाते हैं. इसी वोटबैंक पर कांग्रेस अपने साथ जोड़ने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है. 

प्रियंका गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब सक्रिय राजनीति में कदम रखा था तो उन्होंने मल्लाह समुदाय को सियासी संदेश देने के लिए प्रयागराज से काशी तक की बोट यात्रा भी की थी. हालांकि, उन्हें इस यात्रा का लोकसभा चुनाव में सियासी लाभ नहीं मिल सका था, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए अब कांग्रेस पार्टी मल्लाह समुदाय को जोड़ने के खास प्लान बना रही है. प्रियंका गांधी 2022 के चुनाव के लिए प्रयागराज को मुख्य केंद्र बनाना चाह रहीं हैं. इसके लिए बकायदा एक कार्यालय भी तलाश किया जा रहा है, जहां से प्रियंका पूर्वांचल के सियासी समीकरण को साधने की कवायद करेंगी.

 

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