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वोटिंग में फिसड्डी रहा बांसगांव, अब तक मात्र 55.28 फीसदी मतदान

बांसगांव लोकसभा सीट पर महज 4 उम्मीदवारों के बीच लड़ाई जारी है. कांग्रेस के उम्मीदवार का टिकट खारिज कर दिए जाने के बाद यहां पर मुख्य लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के कमलेश पासवान, बहुजन समाज पार्टी के सदल प्रसाद, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सुरेंद्र प्रसाद और निर्दलीय लांलचंद प्रसाद के बीच है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

बांसगांव लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश के उन संसदीय सीटों में शामिल हैं जहां सबसे कम उम्मीदवारों के बीच चुनावी जंग हुई है. इस सीट पर महज 4 उम्मीदवारों के बीच लड़ाई है. यहां पर 55.28 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला है. कांग्रेस के उम्मीदवार का टिकट खारिज कर दिए जाने के बाद यहां पर मुख्य लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के कमलेश पासवान, बहुजन समाज पार्टी के सदल प्रसाद, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सुरेंद्र प्रसाद और निर्दलीय लांलचंद प्रसाद के बीच है. कमलेश 2014 में बीजेपी के ही टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे.

बांसगांव संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के तहत रविवार (19 मई) को वोट डाले गए. मतदान को लेकर संवेदनशील पोलिंग बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही.

अपडेट्स

बांसगांव में शाम पांच बजे तक मात्र 49.59 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला था.

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बांसगांव लोकसभा सीट पर शाम 4 बजे तक 44.66 फीसदी मतदान हुआ है.

बांसगांव लोकसभा सीट पर दोपहर 2 बजे तक 37.27 प्रतिशत मतदान हो चुका है.

बांसगांव लोकसभा सीट पर दोपहर 12 बजे तक 23.12 प्रतिशत मतदान हो चुका है.

बांसगांव संसदीय सीट पर मतदान धीमा चल रहा है. सुबह 10 बजे तक यहां पर 9.57 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके हैं.

उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में बांसगांव संसदीय क्षेत्र भी शामिल है और इसकी सीट संख्या है 67. यह संसदीय क्षेत्र गोरखपुर जिले के तहत आता है और प्रदेश के अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व 17 सीटों में से एक है. गोरखपुर में 2 संसदीय क्षेत्र हैं जिसमें बांसगांव भी शामिल है. बांसगांव एक नगर पंचायत है और यह शहर ठाकुरों यानी राजपूतों के लिए जाना जाता है, राजपूतों में खासकर श्रीनेत.

2009 से जीत रही बीजेपी

बांसगांव लोकसभा सीट पर 1962 से 2018 तक हुए 14 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 6 बार चुनाव जीत चुकी है. जबकि बीजेपी ने 1991 ने यहां से जीत का अपना खाता खोला था. तब बीजेपी के राज नारायण सांसद बने थे. उसके बाद 2009 से लगातार 2 बार बीजेपी यहां से चुनाव जीत रही है. यह सीट महावीर प्रसाद के नाम से जानी जाती है, जो एक समय प्रदेश के बड़े दलित नेताओं में एक थे. वह यहां से 4 बार लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे लेकिन एक बार उन्हें हार मिली. महावीर प्रसाद ने आखिरी बार 2004 में जीत हासिल की थी.

यह सीट ओम प्रकाश पासवान के लिए भी जानी जाती है, जिनकी हत्या के बाद उनकी पत्नी सुभावती पासवान (1996) यहां से सांसद बनीं. इसके बाद उनके बेटे कमलेश पासवान लगातार 2 बार (2009 और 2014) से लोकसभा चुनाव जीत रहे हैं.

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धर्म आधारित आबादी के आधार पर 93.21 फीसदी आबादी हिंदुओं की है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 6.39 फीसदी (28,626) है. लिंगानुपात के आधार पर देखा जाए तो प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की आबादी 991 है. सामान्य वर्ग के लोगों में यह लिंगानुपात 999 है. साक्षरता दर 71 फीसदी है जिसमें पुरुष 83 फीसदी और महिलाएं 60 फीसदी साक्षर हैं.

कमलेश पासवान को मिली थी जीत

पिछले आम चुनाव में बांसगांव सुरक्षित संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कमलेश पासवान ने जीत हासिल की थी. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के सदल प्रसाद को हराया था.

कमलेश पासवान को चुनाव में कुल 47.6 फीसदी वोट यानी 4,17,959 मत मिले थे जबकि सदल प्रसाद को 2,28,443 (26.0%) मत हासिल हुए. इस तरह से कमलेश ने यह चुनाव 1,89,516 (21.6%) मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. मैदान में कुल 12 उम्मीदवार थे. तीसरे स्थान पर सपा के गोरख प्रसाद रहे जिन्हें 15.2% वोट (1,33,675) मिले.

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