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यूपीः बाराबंकी में मजार बचाने के लिए किसान नेता ने किया फोन तो SDM ने लगाई फटकार

एसडीएम ने किसान नेता को नेतागिरी न करने की ताकीद की और कहा कि किसानों से जुड़ी कोई समस्या हो तो बताओ. एसडीएम ने किसान नेता को जमकर फटकार लगाई.

एसडीएम ने लगाई फटकार एसडीएम ने लगाई फटकार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान नेता ने सड़क किनारे मजार बचाने के लिए किया था फोन
  • एसडीएम दिव्यांशु पटेल ने दी नेतागिरी न करने की सलाह

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में सड़क के किनारे स्थित धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए आदेश दिया था. प्रशासन ने कहा था कि ऐसी जगह चिह्नित कर जिला प्रशासन इससे शासन को अवगत कराए. जिला प्रशासन ने ऐसे स्थलों की सूची बनाकर शासन को भेजने की शुरुआत भी कर दी है. इस बीच इसे लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी में एक ऐसा ही मामला सामने आया है.

किसान नेता आशु चौधरी और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की पोस्ट पर तैनात एक आईएएस अधिकारी के बीच मजार को ना हटाने की बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है. इस वायरल ऑडियो में किसान नेता आशु चौधरी एसडीएम से मजार को ना हटाने की पैरवी कर रहे हैं और एसडीएम की ओर से यह कहा जा रहा है कि वह अपने काम से काम रखें, शासन के काम में दखलअंदाजी ना करें.

जानकारी के मुताबिक बाराबंकी में जिला प्रशासन ने सड़क किनारे से एक मजार को हटा दिया था. साथ ही जिला प्रशासन ने सड़क किनारे या सड़क पर अतिक्रमण कर बने हुए धार्मिक स्थलों की सूची भी शासन को भेज दिया था. एक मजार को हटाने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बाद किसान नेता आशु चौधरी ने वहां के एसडीएम से पैरवी की और एसडीएम ने उन्हें जमकर फटकार लगा दिया जिसका ऑडियो वायरल हो गया है.

वायरल ऑडियो में सुना जा सकता है कि एसडीएम राम सनेहीघाट और किसान नेता आशु चौधरी के बीच तहसील के पास सड़क किनारे बनी मजार को लेकर बात हो रही है. किसान नेता ने एसडीएम दिव्यांशु पटेल से मिलकर बात करने की बात कही लेकिन एसडीएम ने मना कर दिया. एसडीएम ने फोन करने का कारण पूछा. आशु चौधरी मजार हटाने को लेकर जैसे ही नोटिस देने की बात कही, एसडीएम भड़क उठे.

एसडीएम ने किसान नेता को नेतागिरी न करने की ताकीद की और कहा कि किसानों से जुड़ी कोई समस्या हो तो बताओ. एसडीएम ने किसान नेता को जमकर फटकार लगाई. एसडीएम दिव्यांशु पटेल ने इस संबंध में बताया कि सभी को नोटिस दी गई थी. उन्होंने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट में भी याचिका दायर हुई थी जो डिस्पोज ऑफ हो गई है. एसडीएम ने कहा कि न्यायालय ने विपक्षी को यह साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है कि मजार या इबादतगाह जिस जमीन पर है, वह सुन्नी वक्फ बोर्ड की है.

 

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