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योगी सरकार के लिए चुनौती भरा है अवैध धार्मिक स्थलों को हटाना

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध धार्मिक स्थलों को हटाने की दिशा में प्रयास शुरू किया है. जनवरी 2011 के बाद रास्तों पर या सड़कों के किनारे बने धार्मिक स्थलों को हटाने के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं. शासन ने दो माह के अंदर इसकी रिपोर्ट मांगी है.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वर्ष 2009 में सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में यूपी में 40 हजार अवैध धार्मिक स्थलों की बात सामने आई थी
  • 3 जून 2016 में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक जनवरी 2011 के बाद अतिक्रमण करके बने धार्मिक स्थलों को तोड़ने तथा इससे पहले बने धार्मिक स्थलों को शि‍फ्ट करने का आदेश दिया था
  • सरकारी अनुमान के मुताबिक यूपी में अवैध धार्मिक स्थलों की संख्या पिछले दस वर्षों में काफी बढ़ चुकी है

अवैध धर्मस्थलों के कारण किस तरह विकास कार्यों में बाधा पहुंच रही है उसकी बानगी लखनऊ के गोमतीनगर में देखी जा सकती है. वर्ष 2013 में गोमतीनगर में पिकप तिराहे से शुरू होने वाले फ्लाइओवर को पहले डेढ़ किलोमीटर बाद उजरियांव में उतरना था लेकिन यहां बीच सड़क में कब्र‍िस्तान आ गया. कब्रिस्तान न हटे इसके लिए स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया. इसके बाद फ्लाइओवर की लंबाई बढ़ाकर इसे लोहिया पार्क के चौराहे के पास उतारा गया. वर्ष 2018 में उरई जिले में पूरे 14 साल के बाद कालपी में झांसी-कानपुर हाईवे के फोरलेन बनने का रास्ता साफ हो पाया था. नगर में डेढ़ किलोमीटर हाईवे वर्षो से अधूरा पड़ा था. वर्ष 2008-2009 में हाईवे प्राधिकरण ने निर्माण के लिए ध्वस्तीकरण किया गया तो कुछ लोगों ने हाइकोर्ट में रिट दायर कर दी. इसके बाद सड़क के दोनों तरफ भवनों को तोड़ने का काम रोक दिया गया. बीच में मंदिर व मजार भी आ रहे थे. वर्ष 2017 में न्यायालय ने मामले से स्टे हटाकर मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रशासन ने लोगों के साथ बैठकर समस्या का समाधान करने की रूपरेखा बनाई. सौहार्द के माहौल को बनाए रखने के लिए हिंदू और मुस्लिम वर्ग धार्मिक स्थलों को विस्थापित करने पर सहमत हो गए. इसके बाद दोनों धर्मस्थलों को ढहाकर अलग शि‍फ्ट कर दिया गया और हाइवे का निर्माण पूरा किया गया. लखनऊ में कान्यकुब्ज कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर बृजेश कुमार मिश्र कहते हैं, “अवैध धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्त‍ि की जरूरत है. पिछली सरकार में एक महिला आइएएस अधि‍कारी ने कब्रिस्तान की अवैध चारदीवारी ढहवा दी थी तो मामले में बहुत तूल पकड़ा था. ऐसे मामले में संबंधि‍त धर्म के नेता प्रशासन के लिए परेशानी पैदा कर देते हैं. प्रदेश की योगी आदित्याथ की सरकार को ऐसी ही चुनौतियों से निबटना पड़ सकता है.”

यूपी में अवैध ढंग के बने धार्मिक स्थल विवादों को जन्म दे रहे हैं. ये विवाद कोर्ट की चौखट पर भी पहुंचे हैं. 3 जून वर्ष 2016 में इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक जनवरी 2011 के बाद अतिक्रमण करके बने धार्मिक स्थलों को तोड़ने तथा इससे पहले बने धार्मिक स्थलों को शि‍फ्ट करने का आदेश दिया था. इससे पहले वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मि‍क स्थलों को चिन्हि‍त कर उसे हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार ने सर्वे कराया था. इसमें सूबे में 40 हजार धर्मस्थल ऐसे पाए गए जो सड़कों के किनारे, गलियों में, हाइवे या चौराहे पर अवैध तरीके से बनाए गए थे. इन अवैध धार्मिक स्थलों को शि‍फ्ट करने या फि‍र तोड़ने के लिए जिलों में डीएम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी. इस समि‍ति के निर्णय से असंतुष्ट होने पर कमि‍श्नर की अध्यक्षता में दूसरी अपीलीय समिति बनाई गई थी. इसकी त्रैमासिक रिपोर्ट भी समिति के पास आती है. बसपा सरकार में पुलिस विभाग में उच्च पद पर रहे एक अधि‍कारी बताते हैं, “वर्ष 2009 में तत्कालीन सरकार ने एक सर्वे कराया था जिसमें यूपी में 40 हजार अवैध धार्मिक स्थलों की बात सामने आई थी. इसके बाद हड़कंप मच गया था. तत्कालीन सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली थी. इसके बाद से ये धार्मिक स्थल आज तक नहीं हटाए जा सके हैं.” सरकारी अनुमान के मुताबिक यूपी में अवैध धार्मिक स्थलों की संख्या पिछले दस वर्षों में काफी बढ़ चुकी है.

अब यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध धार्मिक स्थलों को हटाने की दिशा में प्रयास शुरू किया है. जनवरी 2011 के बाद रास्तों पर या सड़कों के किनारे बने धार्मिक स्थलों को हटाने के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं. शासन की ओर से कहा गया है कि 1 जनवरी 2011 से पहले बने धार्मिक स्थलों को निजी स्थानों पर शिफ्ट कराया जाएगा. शासन ने दो माह के अंदर इसकी रिपोर्ट मांगी है.

गृह विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि रास्तों या सड़क के किनारे धार्मिक स्थलों के निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह की अनुमति न दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में यह निर्देश शासन की ओर से जारी किए गए हैं.

प्रदेश के सभी फील्ड के अफसरों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई भी धार्मिक स्थल 1 जनवरी 2011 से पहले बनाया गया हो तो उसे योजना बनाकर संबंधित धार्मिक स्थल के अनुयायियों या इसके प्रबंधन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा प्रस्तावित निजी भूमि जो संबंधित के समुदाय की होगी. लेकिन 6 माह के भीतर स्थानांतरित कर दिया जाए या उसे हटा दिया जाए. इसकी अनुपालन आख्या भी शासन को भेजी जाए. प्रवक्ता ने बताया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी. शासन की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी योजना बनाई जाए जिससे सार्वजनिक रास्तों पर धार्मिक गतिविधियों के कारण यातायात या जनता के आवागमन में कोई बाधा न पैदा हो.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने सड़कों के बीच आने वाले ऐसे हजारों धार्मिक स्थलों को हटवाया था जिसके लिए उन्हें संघ परिवार के संगठनों का ही विरोध झेलना पड़ा था. अब यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए मिसाल बनने का समय है.

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