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यूपी में आम के पेड़ काटने पर हाई कोर्ट का प्रतिबंध

इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि ऐसे समय में जब राजनीति में 'आम आदमी' कीअहमियत बढ़ी है, आम के कटते पेड़ भी चिंता का विषय बन गए हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में आम के पेड़ काटे जाने परप्रतिबंध लगा दिया है.

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नहीं कटेंगे आम के पेड़
नहीं कटेंगे आम के पेड़

इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि ऐसे समय में जब राजनीति में 'आम आदमी' की अहमियत बढ़ी है, आम के कटते पेड़ भी चिंता का विषय बन गए हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में आम के पेड़ काटे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि प्रदेश में कोई आम का पेड़ बिना इजाजत न काटा जाए.

कोर्ट ने स्थानीय वकील जयंत सिंह तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया. तोमर ने अपनी याचिका में कहा था कि सरकारी एजेंसियां सड़कें बनाने के नाम पर अकसर हरे और फलदार आम के पेड़ काट देती हैं. तोमर ने दावा किया था कि राजधानी लखनऊ के 'बख्शी का तालाब' और मलीहाबाद जैसे बाहरी इलाकों में कुछ निजी डेवलपर भी इस काम को अंजाम दे रहे हैं.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 'फ्रूट बेल्ट' में 300 से ज्यादा गांव शामिल हैं, जिनमें से 84 में अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि यह सब निजी बिल्डरों के कंस्ट्रक्शन की वजह से हो रहा है.

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इन गांवों में पिछले कुछ समय में कई मैरेज और पार्टी लॉन बने हैं. आम बगीचों के मालिकों की मानें तो पिछले पांच सालों में 40 फीसदी आम के पेड़ काट दिए गए हैं. उन्हें डर है कि आने वाले दस सालों में पूरी 'मैंगो बेल्ट' खत्म हो जाएगी.

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