समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब विकास की बातें करते हैं तो उनकी बातें यूपी की जनता सुनती है. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती . क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ अच्छे काम किए जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है. पर जब वो हिंदू-मुस्लिम पर बातें करने लगते हैं तो इस तरह की हास्यास्पद बातें करते हैं जो उनके लेवल के नेता पर अच्छी नहीं लगती हैं. अखिलेश यादव ने लोकसभा में भी संविधान पर चर्चा के दौरान भी उत्तर प्रदेश के विकास से संबंधित कई बातें की जो बहुत तार्किक थीं पर जब वो संभल पर बातें करने लगते हैं तो वे बुरी तरह फंस जाते हैं. उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ को टार्गेट करने के चक्कर में इस तरह की बातें करने लगते हैं जो खुद उनकी पार्टी के समर्थकों को भारी पड़ने लगता है. जाहिर है कि यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी भी ऐसे ही मामलों पर फोकस करती है जिस पर अखिलेश यादव जब बोलें तो वो खुद फंस जाएं.
सोमवार को उत्तर प्रदेश में संभल समेत कई जिलों में हो रही खुदाई पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सीएम योगी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश भर में कई जगह खुदाई हो रही है. मुख्यमंत्री आवास में भी एक शिवलिंग है, वहां भी खुदाई होनी चाहिए. यादव ने कहा कि पत्रकार आगे चलें मैं पीछे चलूंगा, ताकि आप लोग भाग न पाएं. अखिलेश यादव ने कहा कि सीएम योगी को उनकी रेखाएं दिखवां लेनी चाहिए कहीं उनके हाथ में विकास की नहीं, विनाश की रेखा है. शायद अखिलेश अगर केवल दूसरी लाइन बोलते तो काम चल जाता पर पहली लाइन तो शायद उनके समर्थक भी पसंद न करें.
दरअसल संभल में जो कुछ भी सरकार कर रही है उसे अखिलेश यादव कैसे झुठला सकते हैं. क्या संभल में हिंदूपुर खेड़ा, दीप सराय वगैरह में हिंदुओं को अपना मोहल्ला छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा होगा. अगर जामा मस्जिद एरिया के आस पास के मंदिरों और सरायों और बावड़ियों की खुदाई कराकर प्राचीन अवशेषों को ढूंढा जा रहा है इसमें क्या बुराई है? दुनिया भर के देशों में इस तरह के एक्शन लिए गए हैं. टर्की में तो कई सौ साल पुराने चर्च सोफिया हागिया को मस्जिद बना दिया गया. स्पेन में कितने ही चर्चों को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था उन्हें फिर से उनके पुराने स्वरूप में लाया गया. हर देश जो कभी किसी विदेशी सत्ता का गुलाम रहा है वहां इस तरह का जागरण एक बार होता ही है.
योगी के आवास में शिवलिंग होने की बात वो तंज के रूप में कहते हैं पर आजकल की राजनीति में इस तरह की भाषा का कोई महत्व नहीं रह गया है. कब तंज को असली बात समझ लिया जाएगा ये कोई नहीं जानता . खुद अखिलेश यादव यह जानते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में आंबेडकर का नाम लेकर विपक्ष पर तंज कस रहे थे जिसे अपमान समझ लिया गया. क्या अखिलेश के बयान को भी इस तरह से नहीं लिया जा सकता है?
वैसे भी योगी हों या हिंदू समाज ऐसी जगहों पर ही खुदाई की बात कर रहा है जहां मुस्लिम आंक्रांताओं ने हिंदू प्रतीकों के साथ खिलवाड़ किया. क्या योगी का आवास भी कभी मुस्लिम आंक्रांताओं से संबंधित रहा है? अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की सत्ता को फिर से हासिल करनी है तो उन्हें अपनी छवि इस तरह रखनी होगी जो कम से कम उन्हें हिंदू विरोधी न समझा जाए. क्योंकि अखिलेश के समर्थकों में आज भी हिंदू ही बहुसंख्यक हैं. यहां तक कि सवर्ण भी अखिलेश को बड़े पैमाने पर वोट देते हैं.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार में विकास न होने को लेकर भी सवाल उठाएं हैं. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की जनता के भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए. आज की पीढ़ी को नौकरी और रोजगार की जरूरत है, हर नौजवान को काम चाहिए. आगरा की सड़क देश दुनिया की बेहतरीन सड़कों में हैं. सुखोई और मेराज विमान का टचडाउन भी कराया था. बाद में जिस सड़क पर प्रधानमंत्री का विमान उतरा वह भी सपा सरकार में डिजाइन हुआ था. जर्मनी यात्रा के दौरान मैंने वहां का डिजाइन देख कर यूपी में बनवाया था. देश का सबसे बेहतरीन म्यूजियम आगरा में बनने जा रहा था. सपा सरकार जाने के बाद काम वैसे का वैसा पड़ा हुआ है.
अखिलेश अगर इस तरह की बातें करते हैं तो जाहिर है जनता के बीच उनकी बातों का प्रभाव पड़ेगा. प्रदेश की जनता यह समझती है कि अखिलेश यादव लखनऊ -आगरा एक्सप्रेस वे, डायल 100 सेवा, लखनऊ -नोएडा आदि शहरों में मेट्रो, गोमती रिवर फ्रंट आदि के रूप में बहुत से ऐसे कार्य किए जो जमीन पर आज दिखाई देते हैं. इसलिए योगी से मुकाबले के लिए उन्हें अपने प्लस पॉइंट्स पर ही ध्यान देना चाहिए. विकास की जितनी बातें करेंगे उनके समर्थकों को ही नहीं योगी समर्थकों को भी उनकी बातें अच्छी लेगेंगी. योगी के घर की खुदाई और वहां शिवलिंग होने का तंज उनके लिए भारी ही पड़ने वाला है.