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कौन थे वर्गीस कुरियन?

शनिवार रात श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन का निधन हो गया. नादियाड़ के अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. जानते हैं उनके योगदान के बारे में...

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डॉ. वर्गीस कुरियन
डॉ. वर्गीस कुरियन

शनिवार रात श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन का निधन हो गया. नादियाड़ के अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. जानते हैं उनके योगदान के बारे में...

भारत को दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए श्वेत क्रांति लाने वाले वर्गीज कुरियन को देश में सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की आधारशिला रखने का श्रेय जाता है.

अरबों रुपये वाले ब्रांड ‘अमूल’ को जन्म देने वाले कुरियन का निधन 90 वर्ष की आयु में हुआ.

भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था. उन्हें सामुदायिक नेतृत्व के लिए रैमन मैग्सायसाय पुरस्कार, कार्नेगी-वाटलर विश्व शांति पुरस्कार और अमेरिका के इंटरनेशनल परसन ऑफ द ईयर सम्मान से भी नवाजा गया.

केरल के कोझिकोड में 26 नवंबर, 1921 को जन्मे कुरियन ने चेन्नई के लोयला कॉलेज से 1940 में विज्ञान में स्नातक किया और चेन्नई के ही जी सी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की.

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जमशेदपुर स्थित टिस्को में कुछ समय काम करने के बाद कुरियन को डेयरी इंजीनियरिंग में अध्ययन करने के लिए भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति दी गयी.

बेंगलूर के इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हजबेंड्री एंड डेयरिंग में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुरियन अमेरिका गये जहां उन्होंने मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी से 1948 में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें डेयरी इंजीनियरिंग भी एक विषय था.

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