पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगाल' करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की विधानसभा से पास करवाकर केंद्र को भेज चुकीं हैं, लेकिन केंद्र ने अब तक उस पर कोई फैसला नहीं किया है. इससे मुख्यमंत्री ममता नाराज़ हैं.
दरअसल, पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर हिंदी और उर्दू में बंगाल, इंग्लिश में बेंगाल और बांग्ला भाषा में 'बांग्ला' पुकारे जाने का प्रस्ताव है. ममता का मानना था कि, जब पूर्वी पाकिस्तान नहीं रहा, वह बांग्लादेश हो गया, ऐसे में विभाजन के वक़्त को हम क्यों याद करें.
लेकिन केंद्र ने इस प्रस्ताव पर कुछ सवाल उठाये हैं, जैसे बांग्ला भाषा में प्रदेश का नाम भी 'बांग्ला' होगा, जिस पर कुछ को ऐतराज है. साथ ही एक प्रदेश के तीन नाम पर भी सवाल हैं. इसी के चलते मामला अटका हुआ है. इससे ममता खासी नाखुश हैं, इस बावत बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय को खत भी लिखा है. इस मसले पर तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर का कहना है कि, विभाजन का वक़्त गया, पूर्वी पाकिस्तान ख़त्म हो गया, फिर नाम बदलने में देरी क्यों?
वहीं इस मामले में बीजेपी के कहते हैं कि विधानसभा से जो प्रस्ताव आया है, वह सर्वसम्मति से नहीं बल्कि बहुमत से आया है, इसलिए जल्दबाज़ी में फैसला नहीं किया जा सकता. साथ ही इस मुद्दे पर राज्य में दो राय हैं.
वैसे इस मसले पर ममता से विपक्षी चुटकी भी ले रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि, राज्यों की होने वाली बैठकों में मुख्यमंत्री के बोलने का नंबर अंग्रेजी वर्णमाला के west bengal के w के चलते बाद में आता था, उनको इंतज़ार करना पड़ता था, इसलिए तुगलकी अंदाज़ में उन्होंने ये फैसला कर लिया. ये होना चाहिए, लेकिन सभी दलों के साथ ही समाज के अहम लोगों और से विचार करके माहौल तैयार करके आगे बढ़ना चाहिए था. कुल मिलाकर एक और मुद्दे पर ममता और केंद्र आमने सामने आ गये हैं.