उत्तर प्रदेश में सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती अधर में लटक गई है. दूसरी तरफ सरकार को एक और झटका लगा है. अब तय तारीख पर विवादित परीक्षा में पास दारोगाओं की पासिंग आउट परेड भी नहीं हो पाएगी. सरकार ने 2200 अंडर ट्रेनिंग कैंडिडेट को फाइनल पासिंग आउट परेड कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में डारेक्शन एप्लीकेशन डाली थी. सरकार ने कोर्ट से इसकी इजाजत मांगी थी. अब सरकार को कोर्ट से एक और झटका लगा है.
उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी. एक बार पेपर लीक होने के बाद उसी ढर्रे पर फिर से परीक्षा 12 दिसंबर से 23 दिसंबर के बीच 2017 में कराई गई. 28 फरवरी 2019 को इस परीक्षा का रिजल्ट आया था. बोर्ड पर आरोप है कि मनमाने रवैये और नोटिफिकेशन को ताक पर रखते हुए रिजल्ट बनाया गया था.
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सुप्रीम ने दिया पासिंग आउट परेड को रोकने का आदेश
इस रिजल्ट के खिलाफ 2000 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका डाली थी. डिवीजन बेंच ने नए सिरे से रिजल्ट तैयार करने के लिए कहा था. हाई कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने याचिका डाली. इस बीच अंडर ट्रेनिंग सब-इंस्पेक्टरों के अभ्यर्थियों को पासिंग आउट परेड करने की इजाजत मांगी गई.
गलवान मुठभेड़ के बाद चीन को दो टूक, क्षेत्रीय अखंडता के साथ समझौताइसके खिलाफ हाई कोर्ट से जीत कर आए अभ्यार्थी रवि जायसवाल, गजेंद्र यादव, विवेक उज्जवल और अन्य अभ्यार्थी ने कैविएट डाल कर एडवोकेट कृष्णा एम सिंह और सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने अपना पक्ष पूरी जोर से रखा. सुप्रीम कोर्ट में दवे की दलीलों से सरकार को जोरदार झटका लगा. कोर्ट ने पासिंग आउट परेड को तुरंत रोकने का आदेश पारित कर दिया.