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उमा भारती का तंज, राम मंदिर के लिए कौल ब्राह्मण राहुल करें पहल

मोदी सरकार की मंत्री उमा भारती ने कहा कि शिवभक्त, ब्राह्मण और कौल दत्तात्रेय गौत्र के राहुल गांधी को ममता बनर्जी, अखिलेश यादव के साथ आकर राम मंदिर का निर्माण कराना चाहिए.

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केंद्रीय मंत्री उमा भारती (फाइल फोटो)
केंद्रीय मंत्री उमा भारती (फाइल फोटो)

बाबरी विध्वंस की बरसी पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से राम मंदिर निर्माण की अपील की. उन्होंने कहा कि मैंने अयोध्या निर्माण आंदोलन में भागीदारी की है और 6 दिसंबर 1992 को मैं अयोध्या में मौजूद थी. खुद को शिवभक्त, ब्राह्मण और कौल दत्तात्रेय गोत्र का बताने के बाद मैं राहुल गांधी से उम्मीद करती हूं कि मंदिर निर्माण के लिए पहल करें और आगे आएं.

आजतक से खास बातचीत में उमा भारती ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री से अध्यादेश लाने की मांग करनी चाहिए. वह शिवभक्त हैं. रामजी का मंदिर बनाने से शिवजी प्रसन्न हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि अब तक कांग्रेस ही राम मंदिर में रोड़ा अटकाती रही है. अब कांग्रेस ही इसकी बात करेगी तो इसका समाधान हो जाएगा.

दंगा करा सकती है कांग्रेस

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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने आशंका जताई की कि कांग्रेस दंगा करवाने की पूरी तैयारी में है, क्योंकि उनका दंगे का इतिहास रहा है. कांग्रेस ने 1947 में धर्म के नाम पर विभाजन करवाया, फिर सिखों को लेकर दंगे करवाए और अब भी मंदिर को लेकर भी दंगा करवाने की पूरी साजिश रच रही है.

ममता, अखिलेश, राहुल आएं साथ

उनका कहना है कि राम मंदिर आंदोलन से नहीं बल्कि एक्ट, अध्यादेश या  सामंजस्य से बनेगा. हम लोग तैयार हैं. जैसे बनाने के लिए सभी लोग इकट्ठे हो गए थे. इसी तरह अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, राहुल गांधी सभी को एक होना होगा.

राम मंदिर पर बीजेपी का पेटेंट नहीं

उमा भारती ने साफ किया कि बीजेपी ने राम मंदिर को कभी भी वोट लेने का मुद्दा नहीं माना. उनका कहना है कि राम पर हमारा कोई पेटेंट नहीं है, राम सबके हैं. का निर्माण आसानी से हो सकता है. कोई मुसलमान भी इसका विरोध नहीं करेगा.

राम मंदिर का समाधान आसान

ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी ने कहा था कि बहुमत होता तो राम मंदिर भी बना देते, लेकिन तब बहुमत नहीं था. आज मोदीजी की सरकार के पास बहुमत है. राम मंदिर का समाधान बहुत आसान है, जिसकी जमीन है उससे दूसरा पक्ष बात कर सकता है, अध्यादेश लाकर भी और कानून से भी हो सकता है.

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