गुजरात और हिमाचल में जीत के बाद आखिर दोनों राज्यों का मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर आज फैसला हो सकता है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के येरूशलम पर फैसले को यूएन में झटका लगा है. पढ़ें शुक्रवार सुबह की पांच बड़ी खबरें..
किसके सिर सजेगा गुजरात-हिमाचल का ताज, आज हो सकता है ऐलान
भारतीय जनता पार्टी के खेमे में गुजरात और हिमाचल के मुख्यमंत्री के लिए मंथन जारी है. दोनों राज्यों में शुक्रवार को विधायक दल की बैठक है, जिसके बाद मुख्यमंत्रियों के नाम पर मुहर लग जाएगी. कांटे की टक्कर में बीजेपी गुजरात फतह करने में तो कामयाब रही लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री को लेकर मंथन जारी है. आज गांधीनगर में जीतकर आए बीजेपी के विधायकों की बैठक होगी, जिसमें तय होगा कि किसके सिर ताज सजेगा.
2G केसः CBI-ED के लिए क्यों आसान नहीं होगा ओपी सैनी के फैसले को चुनौती देना?
तेजतर्रार माने जाने वाले स्पेशल जज ओ पी सैनी ने टू-जी केस में 1550 पेज का जजमेंट बड़े सधे अंदाज में और सूझबूझ के साथ लिखा है. जांच एजेंसियों यानी अभियोजन पक्ष सीबीआई और ईडी के लिए इसे चुनौती देना अच्छी खासी चुनौती ही होगा. क्योंकि जज ओपी सैनी ने साफ शब्दों में बिना लागलपेट के सीबीआई और ईडी के साथ दूरसंचार विभाग के बाबुओं के सामान्य ज्ञान, तकनीकी ज्ञान और कानूनी ज्ञान सबकी पोल खोल कर रख दी.
UN में अमेरिका की किरकिरी, येरूशलम पर भारत समेत 128 देशों ने विरोध में दिया वोट
संयुक्त राष्ट्र में आज अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. येरूशलम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के खिलाफ यूएन में प्रस्ताव पास हो गया है. इस प्रस्ताव के समर्थन में भारत समेत 128 देशों ने वोट किया, जबकि महज 9 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया. इस प्रस्ताव के पास होने से अमेरिका को अब अपना फैसला बदलना पड़ेगा.
लंबी है देश में हुए घोटालों की फेहरिस्त, जानिए किस सरकार में कितने हुए
क्या जिस 2G घोटाले ने सत्ता पलट कर रख दी, वो हुआ ही नहीं? क्या इससे पहले भी ऐसे मामलों में ऐसा ही होता रहा? ये सवाल इसलिए है कि भारत में यह पहला बड़ा घोटाला नहीं था. इससे पहले भी कई घोटाले हुए, लेकिन आजतक किसी भी मामले में आरोपियों को सजा नहीं मिली.
मोदी-नीतीश की रणनीति संभालने वाले प्रशांत किशोर की गुजरात चुनाव में नहीं हुई कोई चर्चा
2014 के आम चुनाव में देश के सियासी फलक पर नरेंद्र मोदी का उभार एक और नई सियासी तस्वीर लेकर आया. मोदी की जीत, ब्रांडिंग और सबको चौंकाने वाले चुनावी अभियान के लिए चुनावी रणनीतिकार को श्रेय दिया गया. इसके बाद भारत की राजनीति में चुनाव कैंपेंनिंग एक वास्तविकता बन गई और प्रशांत किशोर इस क्षेत्र में एक बड़े ब्रांड.