भारत पाक वार्ता से पहले गृह सचिव जी के पिल्लई की ओर से की गई टिप्पणी को अस्वीकार करते हुए विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने बुधवार को कहा कि उनकी पूरी इस्लामाबाद यात्रा उस टिप्पणी में उलझकर रह गई जिसका समय ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ था.
मुंबई हमले में आईएसआई की संलिप्तता के बारे में पिल्लई के बयान से साफ तौर पर नाखुश कृष्णा ने कहा कि अगर वह गृह सचिव होते तो वह पाकिस्तानी अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली द्वारा किए गए खुलासों के बारे में नहीं बोलते. पिल्लई ने यह बयान कृष्णा के बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने से एक दिन पहले दिया था.
कृष्णा ने कहा कि तथ्यात्मक रूप से पिल्लई हेडली द्वारा एफबीआई और भारतीय जांच अधिकारियों के समक्ष किए गए खुलासों के संबंध में बोलते हुए बिल्कुल सही थे लेकिन ‘इसका वक्त बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था.’ मंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ पिल्लई की टिप्पणी के बारे में चर्चा की. कृष्णा ने प्रधानमंत्री को पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी और अन्य नेताओं के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी थी.
पाकिस्तान से वार्ता पर भाजपा के रुख से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी इस्लामाबाद यात्रा के पहले भाजपा नेताओं को जानकारी दे दी थी और पाकिस्तान के साथ बातचीत की इच्छा प्रेषित कर दी थी. उन्होंने कहा, ‘कोई विकल्प नहीं है. अगर कोई विकल्प पेश कर सकता है तो मैं उसपर विचार कर सकता हूं.’ {mospagebreak}
वार्ता के बाद कुरैशी के गैर कूटनयिक टिप्पणी और उनकी अनदेखी के बारे में पूछे गये सवाल पर कृष्णा ने कहा, ‘मैं अपने काम से काम रखना चाहता हूं और अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं.’ हालांकि, उन्होंने कुरैशी के जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद के भारत विरोधी बयानों और आईएसआई के बारे में पिल्लई की टिप्पणी की तुलना करने को हास्यास्पद कहकर खारिज कर दिया.
मंत्री ने कहा कि 26 नवंबर के हमले की समूची साजिश कैसे रची गई और इसे कैसे अंजाम दिया गया उसका सूक्ष्म विवरण ‘साजिश की क्रूर प्रकृति को दर्शाता है.’ उन्होंने कहा कि ये तथ्य हेडली से एफबीआई द्वारा की गई पूछताछ में सामने आए थे और इससे ये षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर और जिम्मेदारी डालते हैं.
विदेश मंत्री ने कुरैशी की ओर से दिए गए उस आश्वासन का स्वागत किया जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हेडली की ओर से दिए गए सुरागों पर कार्रवाई करेगा और मुंबई हमले में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई को तेज करेगा. उन्होंने कहा, ‘मैं इस बारे में खुश हूं. इसकी ही पाकिस्तान सरकार से अपेक्षा थी.’ कुरैशी के साथ उनकी बातचीत का पहला सत्र अच्छा रहने पर भारतीय अधिकारियों के कुछ अच्छी खबर का वादा करने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कृष्णा ने कहा कि वह अंतिम क्षण तक बैठक के नतीजे को लेकर ‘बहुत आश्वस्त’ नहीं थे. {mospagebreak}
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ उनकी बैठक के बारे में पूछे जाने पर कृष्णा ने कहा कि उन्होंने कुरैशी के साथ बैठक में जो भी चर्चा हुई इसकी उन्हें जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘वह खुश हैं कि भारत और पाकिस्तान बातचीत कर रहे हैं.’ यह पूछे जाने पर कि क्या हिलेरी ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था, मंत्री ने कहा, ‘मुझसे विशेष तौर पर कोई उल्लेख नहीं किया गया.’ पहले हिलेरी ने भारत-पाक रिश्तों में कश्मीर को एक बाधा बताया था. हालांकि, विदेश मंत्री ने इस बात से असहमति जताई कि कश्मीर दोनों देशों के बीच एकमात्र मुद्दा है. उन्होंने कहा, ‘कश्मीर उन सवालों में से एक है जो भारत और पाकिस्तान को जुदा रखता है लेकिन कई अन्य चिंताएं हैं यथा आतंकवाद.’
उन्होंने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में चरणबद्ध रुख की भी वकालत की. उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर, सियाचिन और सर क्रीक जैसे जटिल मुद्दों पर विचार करने से पहले उन मुद्दों के साथ शुरूआत करना चाहता है जो दोनों देशों के लिए मददगार और लाभप्रद हैं यथा मछुआरों की रिहाई, जनता के स्तर पर संपर्क. कृष्णा ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ अपनी बातचीत में भारत की तात्कालिक चिंता आतंकवाद के मुद्दे को उठाया.
उन्होंने कहा, ‘अगर मैंने 26 नवंबर के बारे में और उसके बाद जो कुछ भी हुआ उसका निराकरण करने के लिए पाकिस्तान पर पर्याप्त दबाव नहीं डाला होता तो विदेश मंत्री के तौर पर अपने कर्तव्य में मैं विफल रहता.’ उन्होंने कहा, ‘मैं जानना चाहता था कि मुकदमा कैसे आगे बढ़ रहा है. मैं उसके बारे में जानना चाहता था. मैं मुकदमे में तेजी चाहता था. अन्य सभी बातें बाद में आ सकती हैं.’