सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि धर्म के नाम पर हमला या हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने पुणे में 2 जून 2014 के एक हत्या मामले में आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए अपने फैसले में यह बात कही.
कोर्ट ने कहा कि घिनौने, नृशंस और अमानवीय तौर पर किये गए अपराध को किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने अपने फैसले में ऐसे अपराध पर सख्त चेतावनी दी और कहा कि धर्म के नाम पर हमला या हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों से भी कहा कि वे अपने आदेश में ऐसी कोई टिप्पणियां न करें जो किसी समुदाय जाति या धर्म के पक्ष में या खिलाफ महसूस हों. कोर्ट ने पुणे के इस हत्या मामले में अभियुक्तों को जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामला दोबारा विचार के लिए हाई कोर्ट भेज दिया.
कोर्ट ने कहा कि मामलों पर सुनवाई करते समय अदालत को देश के समरस संस्कृति और बहुलतावादी समाज का ध्यान रखना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुमकिन है कि अपराध के पीछे अभियुक्तों की पीड़ित के साथ निजी दुश्मनी न हो, बल्कि धार्मिक नफरत हो. इस बारे में हाईकोर्ट के जज का इरादा किसी समुदाय की भावनाएं आहत करने का नहीं होगा, लेकिन ये टिप्पणी आलोचनाओं को बल देती है.
हाई कोर्ट ने हत्या के अभियुक्तों को जमानत देते हुए अपने आदेश में कहा था कि अभियुक्तों की मृतक से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी. मृतक का कुसूर सिर्फ इतना था कि वह दूसरे धर्म का था. महाराष्ट्र के पुणे में 2 जून 2014 के एक हत्या के मामले में आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने हत्या जैसा जघन्य अपराध तो किया ही है. चाहे वजह रंजिश हो या नफरत.