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अब मेडिकल रिसर्च के काम आएगा पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का पार्थिव शरीर

महान वामपंथी नेता और लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने निधन से पहले अपना शरीर दान कर दिया था. अब उनके पार्थिव शरीर को लेप लगाकर सुरक्षित रखा जाएगा ताकि इसका इस्तेमाल मेडिकल रिसर्च में किया जा सके.

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लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी (फोटो-सुबीर हल्दर)
लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी (फोटो-सुबीर हल्दर)

लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, बल्कि कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में रखा जाएगा जहां उसका इस्तेमाल मेडिकल रिसर्च के लिए किया जाएगा.

देश के कद्दावर नेताओं में शुमार वामपंथी नेता सोमनाथ ने पहले ही अपना शरीर दान कर दिया था. अब उनके शरीर पर लेप लगाकर अन्य पार्थिव शरीर की तरह अस्पताल में रखा जाएगा. हालांकि शव लेपन की प्रक्रिया बेहद कठिन है और इसे अन्य पार्थिव शरीर के साथ ही किया जाएगा.

शव लेपन की प्रक्रिया कठिन

आईपीजीएमईआर कॉलेज एंड हॉस्पिटल में अनैटमी (शरीर रचना विज्ञान) के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर असीस कुमार घोषाल ने कहा कि बॉडी के आने के बाद उसे लेपन कक्ष में ले जाया जाता है. शव पर लगाए जाने वाले लेप में फर्मेल्डहाइड (एक प्रकार की गैस), 500 मिलीलीटर ग्लिसरीन, 500 मिलीलीटर शुद्ध अल्कोहल और कुछ कलरिंग एजेंट (मरक्यूरिक सल्फाइड की तरह) के मिक्सचर को शरीर के अंदर इंजेक्शन या फिर शव लेपन मशीन के जरिए पहुंचाया जाता है.

उन्होंने आगे कहा कि शरीर को तब स्टोरेज टैंक, मरकरी कूलर या डीप फ्रीज में रखा जाता है. यह तब तक रखा जाता है जब तक टिश्यू कड़े नहीं हो जाते. शव को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने के लिए मरकरी कूलर में रखा जाता है.

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यह प्रक्रिया सभी मेडिकल संगठनों और संस्थाओं में अपनाई जाती है जहां मेडिकल की पढ़ाई कराई जाती है. इसका इस्तेमाल अकादमिक रिसर्च के लिए भी किया जाता है. हम अपने सिलेबस में एमडी, एमबीबीएस, नर्सिंग या पैरामेडिकल छात्रों को शरीर के विभिन्न अंगों के बारे में जानकारी देने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं.

सबके साथ एक जैसा व्यवहार

लोकसभा के पूर्व स्पीकर और आम इंसान के मृत शरीर के साथ शव लेपन की प्रक्रिया के बारे में असीस कुमार घोषाल ने बताया कि हम किसी भी पार्थिव शरीर में कोई अंतर नहीं समझते. नामचीन हस्ती हो या फिर कोई आम आदमी, हम सभी के साथ एक तरह की प्रक्रिया ही अपनाते हैं.

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उन्होंने कहा कि जब हम अनैटमी हॉल में जाते हैं तो हम एक-दूसरे से शपथ लेते हैं कि हर शव के साथ एक जैसा ही व्यवहार करेंगे.

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