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जानें, कौन है भगवा आतंकवाद पर 'चौतरफा' घिरे असीमानंद, सबमें हुए बरी

समझौता ब्लास्ट केस में आरोपी असीमानंद को बड़ी राहत मिली है. पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है. अपने ज्वलंत भाषण और अल्पसंख्यक विरोधी रुख रखने के लिए जाने जाने वाले असीमानंद का नाम 2007 में हैदराबाद में मक्का मस्जिद में विस्फोट, 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में विस्फोट, अजमेर दरगाह में धमाके जैसी वारदातों से जुड़ा रहा.

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स्वामी असीमानंद को मिली बड़ी राहत स्वामी असीमानंद को मिली बड़ी राहत

समझौता ब्लास्ट केस में आरोपी असीमानंद को बड़ी राहत मिली है. पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है. अपने ज्वलंत भाषण और अल्पसंख्यक विरोधी रुख रखने के लिए जाने जाने वाले असीमानंद का नाम 2007 में हैदराबाद में मक्का मस्जिद में विस्फोट, 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में विस्फोट, अजमेर दरगाह में धमाके जैसी वारदातों से जुड़ा रहा.

स्वामी असीमानंद का नाम जैसे कई धमाकों में जुड़ा रहा वैसे ही उनके कई नाम हैं. जतिन चटर्जी उर्फ नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी ओंकारनाथ उर्फ स्वामी असीमानंद. वनस्पति विज्ञान में स्नातक असीमानंद पश्चिम बंगाल के हूगली का निवासी हैं और उच्च शिक्षित हैं.

1990 से 2007 के बीच स्वामी असीमानंद RSS से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम का प्रांत प्रचारक प्रमुख रहे. असीमानंद 1995 के आस-पास गुजरात के डांग जिले के मुख्यालय आह्वा आए और हिंदू संगठनों के साथ 'हिंदू धर्म जागरण और शुद्धीकरण' के काम में लग गए.

आह्वा में असीमानंद ने शबरी माता का मंदिर बनाया और शबरी धाम की स्थापना की. पुलिस के मुताबिक 2006 में मुस्लिम समुदाय को आतंकित करने के लिए किए गए विस्फोटों से ठीक पहले असीमानंद ने इसी शबरी धाम में कुंभ का आयोजन किया.

कुंभ के दौरान धमाके में शामिल करीब 10 लोग इसी आश्रम में रहे. इसके अलावा असीमानंद बिहार के पुरुलिया, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी सक्रिय रहे.

सीबीआई का दावा है कि स्वामी हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे. उन्होंने फर्जी परिचय पत्र भी हासिल किए. सीबीआई स्वामी के पास से कोलकाता से जारी हुआ पासपोर्ट, कई फर्जी राशन कार्ड और हरिद्वार प्रशासन द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र भी जब्त कर चुकी है.

स्वामी असीमानंद की तलाश 2009 के बाद से शुरू हुई जब सुरक्षा एजेंसियों को यह ठोस जानकारी मिली कि आरोपी अपने भेष बदलता है. सूत्रों के मुताबिक, स्वामी की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिलने के बाद सीबीआई तथा एटीएस (महाराष्ट्र) ने वर्ष 2009-10 में मध्य प्रदेश और गुजरात के विभिन्न स्थानों की तलाशी ली.

मालेगांव ब्लास्ट केस में नाम आया सामने

स्वामी का नाम मालेगांव विस्फोट की जांच के दौरान भी सामने आया जब महाराष्ट्र की एटीएस को मामले की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से स्वामी के वाहन चालक का नंबर मिला.

स्वामी असीमानंद ने 2011 में मजिस्ट्रेट को दिए इकबालिया बयान में स्वीकार किया था कि अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और कई अन्य जगहों पर हुए बम ब्लास्ट में उनका और कई अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों का हाथ है. हालांकि बाद में असीमानंद अपने बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने पिछला बयान NIA के दबाव में दिया था.

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