उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मालेगांव विस्फोट के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया.
पुरोहित ने अपनी याचिका में अंतरिम जमानत की मांग की है और कठोर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत अपने अभियोजन को चुनौती दी है. न्यायमूर्ति मार्कंडेय काट्जू और न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर की पीठ ने पुरोहित की याचिका पर जवाब देने के लिए राज्य सरकार को चार हफ्ते का वक्त दिया.
पुरोहित ने यह याचिका अपने वकील शिवाजी एम जाधव के जरिए दायर की. पुरोहित ने अपनी याचिका में इस आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की कि वह विगत 18 महीने से जेल में पड़े हैं और मुकदमा पूरा होने में अच्छा खासा वक्त लगेगा. उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी जिसमें उसने पुरोहित पर मकोका लगाने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा.
पुरोहित के अनुसार विशेष मकोका अदालत द्वारा विशेष अधिनियम के तहत पूर्व में आरोपों को निरस्त किए जाने के बावजूद उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ मकोका के प्रावधानों को बरकरार रखकर गलती की. हालांकि, विशेष अदालत ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों को बरकरार रखा था.
पुरोहित ने दावा किया कि मकोका लगाने के लिए उनके पूर्ववृत्त के बारे में ठोस सूचना होनी चाहिए. चूंकि उनके खिलाफ पूर्व में कोई आपराधिक मामला नहीं है इसलिए उनके खिलाफ मकोका नहीं लगाया जा सकता. पुरोहित को महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने सितंबर 2008 में हुए मालेगांव धमाके में उनकी कथित भूमिका को लेकर गिरफ्तार किया था. उस विस्फोट में छह लोगों की जान गई थी.