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कलावती, जसूबेन के मुकाबले शिवराज के सुंदर भैया

देश की सियासत में इन दिनों नामचीन नेताओं द्वारा आम लोगों का हवाला देकर तरक्की के फलसफे सिखाने का दौर चल रहा है. इस चलन में राहुल गांधी की 'कलावती' व नरेन्द्र मोदी की 'जसूबेन' के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के 'सुंदर भैया' धमाल मचाते नजर आ रहे हैं.

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देश की सियासत में इन दिनों नामचीन नेताओं द्वारा आम लोगों का हवाला देकर तरक्की के फलसफे सिखाने का दौर चल रहा है. इस चलन में राहुल गांधी की 'कलावती' व नरेन्द्र मोदी की 'जसूबेन' के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के 'सुंदर भैया' धमाल मचाते नजर आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को जिले के केसली विकासखंड में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, गांवों के पारंपरिक शिल्प में लगे कारीगरों के पेशों को बचाने के लिए नई योजना बनाने का विचार उन्हें सुंदर भैया को देखकर आया. उन्होंने बताया कि सुंदर भैया उनके पैतृक गांव में बरसों से हजामत बनाने का काम करते रहे हैं. लेकिन घर-घर जाकर, फट्टी पर बैठाकर हजामत बनाने का उनका पुराना तरीका नई पीढ़ी को रास नहीं आ रहा है. इसके चलते गांव के युवाओं ने हजामत बनवाने के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना शुरू कर दिया.

इस बात का अहसास उन्हें कुछ दिन पहले हुआ, जब उनके पैतृक गांव जैत से मुख्यमंत्री भवन में मिलने आए कुछ युवकों से बातचीत में पूछा कि किस काम से शहर आए हो, तो युवकों ने बड़े ही सहज अंदाज में जवाब दिया कि काम कुछ नहीं था हजामत बनवाने आए थे, इसलिए सोचा की भैया से ही मिलते जाएं.

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मुख्यमंत्री ने जब युवाओं से पूछा कि गांव के सुंदर भैया से हजामत क्यों नहीं बनाते, तो उन्होंने टका-सा जवाब दिया कि पुराने ढंग से फट्टी पर बैठकर हजामत बनवाना उन्हें अब अच्छा नहीं लगता है. शिवराज ने कहा कि सुंदर भैया के बारे में युवाओं की सोच से रू-ब-रू होने के बाद उन्होंने प्रदेश के 53 हजार गांवों में पारंपरिक काम में लगे कारीगरों मोची, नाई, धोबी, सुनार, बढ़ई व कुम्हार आदि के काम धंधों को बचाने के लिए योजना बनाई. इसके तहत उनको कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वो अपने पारंपरिक कामकाज में नए जमाने के तौर-तरीकों के मुताबिक बदलाव ला सकें. नए-नए उपकरण व तकनीकों का उपयोग कर सकें.

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों को काम-धंधे में बदलाव के लिए 50 हजार तक का कर्ज दिया जाएगा. जिसके लिए 10 हजार रुपये की मार्जिन राशि सरकार भरेगी, कर्ज पर 10 हजार रुपये की छूट मिलेगी, साथ ही ब्याज पर 5 साल तक 5 फीसदी की भी छूट दी जाएगी. इतना ही नहीं 2000 तक की आबादी वाले गांवों में 300 करोड़ रुपये की ग्रामीण हाट योजना के तहत 5-5 दुकानें भी बनाकर दी जाएंगी. इससे प्रदेश के 5 लाख पारंपरिक कारीगर नाई, मोची, धोबी सुनार, कुम्हार अपनी आधुनिक दुकान खोल सकेंगे.

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शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस योजना के बाद गांव के युवक कम से कम यह कहकर तो शहर की ओर आकर्षित नहीं होंगे कि उनके गांव के सुंदर भैया आरामदायक कुर्सी पर बैठाकर, पंखे की ठंडी हवा में खुशबूदार क्रीम लगाकर हजामत नहीं बनाते हैं.

गौरतलब है कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका से परमाणु समझौते पर संसद में भाषण के दौरान महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र की कलावती बादुनकर का जिक्र करते हुए कहा था कि परमाणु समझौता कलावतियों की जिंदगी को रोशन करेगा. वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री ने उद्यमिता क्षेत्र में सफलता का गुणगान के लिए गुजरात की जसूबेन व उनके पीजा का उल्लेख किया था.

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