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कोलकाता के स्‍लम से बकिंघम पैलेस तक का सफर: एक भारतीय ने की प्रिंस जॉर्ज के जन्म की घोषणा

कोलकाता के स्‍लम में पैदा हुए 25 साल के बदर अजीम ने लंदन में प्रिसं जॉर्ज के जन्म की पूरे इंग्लैंड में घोषणा करने में अहम भूमिका अदा की. हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट में ग्रैजूएशन कर चुके बदर इस समय इंग्लैंड की रॉयल फैमिली में नौकरी करते हैं.

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बदर अजीम
बदर अजीम

कोलकाता के स्‍लम में पैदा हुए 25 साल के बदर अजीम ने लंदन में प्रिसं जॉर्ज के जन्म की पूरे इंग्लैंड में घोषणा करने में अहम भूमिका अदा की. हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट में ग्रैजूएशन कर चुके बदर इस समय इंग्लैंड की रॉयल फैमिली में नौकरी करते हैं.

'डेली मेल के मुताबिक, बकिंघम पैलेस के बाहर रॉयलब बेबी के जन्म की घोषणा करने के लिए बदर महारानी की मीडिया सचिव एलिजा एंडरसन के साथ बकिंघम पैलेस के बाहर आए.

बदर ने कोलकाता की जिस मलिन बस्ती में अपना बचपन गुजारा था, उनकी मां मुमताज बेगम और पिता मोहम्मद रहीम आज भी उसी बस्ती में रह रहे हैं. लंदन में शाही बच्चे के जन्म की घोषणा में शामिल होने के बाद बदर के 20 साल के भाई मजहर ने उनसे बात की.

डेली मेल ने मजहर के हवाले से कहा कि बदर ने इसके बारे में बहुत साधारण अंदाज में बात की, लेकिन उसके लिए यह क्षण बहुत गर्व वाले थे. मजहर के मुताबिक, 'मेरे माता-पिता को भी इस पर बहुत गर्व है. जब तक उसने वहां नौकरी नहीं की थी, वे (बदर के माता-पिता) इंग्लैंड के शाही परिवार के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे. वे सच में बेहद आश्चर्यचकित हैं.'

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मजहर ने आगे बताया कि हमें इसके बारे में पहले से कुछ भी पता नहीं था. इसके बारे में हमने अखबारों में पढ़कर ही जाना. आज बदर का परिवार काफी बड़ा हो चुका है और नौ सदस्यों का यह परिवार दो कमरे वाले घर में रहता है.

मजहर ने आगे बताया, 'हम बेहद गरीब परिवार से आते हैं. हमारे माता-पिता हमें बिस्तरों पर सुलाते हैं और खुद जमीन पर सोते हैं. लेकिन मेरे पिता हमें बेहतर शिक्षा देना चाहते थे. यहां तक कि उन्होंने हमें अच्छी शिक्षा देने के लिए कर्ज तक लिया.'

बदर की पढ़ाई का पूरा खर्च आयरलैंड के सेंट मैरी ऑर्फनेज और डे स्‍कूल ने उठाया था, जिसे आयरलैंड के दो भाई चलाते हैं. इस संस्‍था ने ही बदर को कोलकाता के होटल मैनेजमेंट संस्‍थान भेजा था.

संस्‍थान में दो साल बिताने के बाद बदर को स्‍कॉटलैंड भेज दिया गया, जहां उसने साल 2011 में इडिनबर्ग नेपियर यूनिवर्सिटी से हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट में डिग्री हासिल की. फरवरी 2012 में उसे बकिंघम पैलेस में नौकरी मिल गई.

बदर का कहना है, 'मैं पहले भारत में जिस तरह से रहता था आज हालात उससे बिलकुल जुदा हैं.'

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