प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह म्यामां का अपने दो दिन का दौरा खत्म करने के बाद स्वदेश लौट आए हैं. अपने विदेश दौरे में उन्होंने तीसरे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. मनमोहन सिंह की इस विदेश यात्रा के दौरान खास बात यह रही है कि लौटते समय विमान में उन्होंने पत्रकारों से बात नहीं की.
आमतौर पर प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा से लौटते समय पत्रकारों से बातचीत करते हैं. इसके लिए बाकायदा कार्यक्रम निर्धारित होता है और पूरी तैयारी की जाती है. लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हुआ. पीएम की जगह पत्रकारों से बात करने विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद आए. पीएम के नहीं आने की वजह क्या हो सकती है? इस पर खुर्शीद ने कहा, 'पीएम मुझे टेस्ट करना चाहते थे. अगर वो आते तो शायद मुझे मौका नहीं मिलता.
विरोधी मनमोहन सिंह पर आरोप लगाते हैं वो कुछ बोलते ही नहीं हैं. हालांकि, अपनी पिछली विदेश यात्रा से लौटते समय मनमोहन सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई बातें ऐसी की जो सुर्खियां बनीं. उन्होंने बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर वो प्रधानमंत्री बने तो तबाही आ जाएगी. पीएम ने इसके साथ ही आम चुनाव से पहले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने का रास्ता साफ किया था.
इस बार म्यांमा दौरे पर सिंह ने शिखर सम्मेलन से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. उन्होंने म्यामां के राष्ट्रपति यू थी सीन, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और म्यामां की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सूची से मुलाकात की. सिंह ने शिखरवार्ता में अपने संबोधन में बिम्सटेक क्षेत्र में आतंकवाद के उभरते खतरे के बारे में आगाह करते हुए सात सदस्यीय समूह से मजबूत सहयोग की मांग की ताकि आतंकवाद का मुकाबला पुरजोर तरीके से किया जा सके.
सातों देशों भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड, म्यामां, भूटान और नेपाल में दुनिया की 20 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या रहती है जो करीब 15 करोड़ है. सिंह करीब दो साल के अंतराल के बाद म्यामां गए थे. प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनकी आखिरी विदेश यात्रा हो सकती है.